नीट पेपर लीक मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई लातूर के मशहूर एम सर गिरफ्तार, मोबाइल में मिला लीक प्रश्नपत्र

नीट पेपर लीक मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई लातूर के मशहूर एम सर गिरफ्तार, मोबाइल में मिला लीक प्रश्नपत्र

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक बड़ी कामयाबी मिली है। सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक बेहद रसूखदार और बड़े कोचिंग संचालक को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी के शक के दायरे में आए इस टीचर के पास परीक्षा से करीब 10 दिन पहले ही लीक हुआ पेपर पहुंच चुका था, जिसके पुख्ता सबूत एजेंसी के हाथ लगे हैं।

कौन हैं गिरफ्तार हुए 'एम सर' उर्फ शिवराज मोटेगांवकर?

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी का पूरा नाम शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर है। छात्रों और कोचिंग इंडस्ट्री के बीच वे ‘एम सर’ (M Sir) के नाम से बेहद मशहूर हैं।

कोचिंग एंपायर के मालिक: शिवराज मोटेगांवकर महाराष्ट्र में नीट (NEET) और जेईई (JEE) की तैयारी कराने वाले सबसे बड़े कोचिंग नेटवर्कों में से एक, रेणुकाई करियर सेंटर / रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस (RCC) के संस्थापक हैं।

40 हजार छात्रों का नेटवर्क: मोटेगांवकर ने एक सफल केमिस्ट्री टीचर और एंटरप्रेन्योर के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। आरसीसी का नेटवर्क महाराष्ट्र के कई जिलों में फैला हुआ है, जहां हर साल लगभग 40,000 छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

रविवार को हुई गिरफ्तारी; मोबाइल से मिला अकाट्य सबूत

अधिकारियों द्वारा सोमवार को साझा की गई जानकारी के अनुसार, सीबीआई की टीम पिछले चार दिनों से लातूर में डेरा डाले हुए थी। रविवार को एजेंसी ने लातूर के शिवनगर इलाके में स्थित आरसीसी के मुख्य कार्यालय और अन्य परिसरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, जो देर शाम तक चली।

मोबाइल में मिला लीक पेपर: तलाशी के दौरान सीबीआई को शिवराज मोटेगांवकर के मोबाइल फोन से मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) का लीक हुआ प्रश्नपत्र और उत्तर (Answer Key) बरामद हुए।

परीक्षा से 10 दिन पहले मिला पेपर: सीबीआई का आरोप है कि मोटेगांवकर नीट प्रश्नपत्र को लीक करने और उसे प्रसारित करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का सक्रिय सदस्य है। उसने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 23 अप्रैल, 2026 को होने वाली नीट परीक्षा से 10 दिन पहले ही पेपर हासिल कर लिया था और इसे कई लोगों में बांट भी दिया था।

जांच के दायरे में एनटीए के अंदरूनी सूत्र और लातूर के डॉक्टर्स

इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद सीबीआई अब इस रैकेट की जड़ों तक पहुंचने के लिए कई मोर्चों पर जांच कर रही है:

विवेक पाटिल नाम का शख्स भी रडार पर: सीबीआई के दायरे में विवेक पाटिल नाम का एक अन्य व्यक्ति भी है, जिसके पास यह लीक पेपर भेजा गया था।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच: आरसीसी के परिसरों से सीज किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप, आईपैड और डिजिटल स्टोरेज सिस्टम को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि डिजिटल ट्रेल (डेटा ट्रांसफर की टाइमलाइन) का पता लगाया जा सके।

एनटीए (NTA) के अंदरूनी सूत्रों पर शक: जांचकर्ता इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या मोटेगांवकर या उसके गिरोह की पहुंच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पेपर सेटिंग प्रोसेस या कॉन्फिडेंशियल एग्जामिनेशन मैटीरियल से जुड़े किसी अंदरूनी अधिकारी (Insider) तक थी।

डॉक्टरों से कनेक्शन: सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई को संदेह है कि लातूर के कुछ रसूखदार डॉक्टरों ने अपने बच्चों या करीबियों के लिए नीट-यूजी 2026 का यह लीक प्रश्नपत्र मोटी रकम देकर खरीदा था।

इससे पहले भी सीबीआई लातूर और पुणे में मोटेगांवकर से कई दौर की लंबी पूछताछ कर चुकी थी। मोबाइल से पुख्ता सबूत मिलने के बाद आखिरकार उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। इस कार्रवाई से महाराष्ट्र के कोचिंग इकोसिस्टम और शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।

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