कंटीले तार, वाटर कैनन, आंसू गैस और भारी पुलिस बल: आखिर छात्र आंदोलन पर इतनी सख्ती क्यों
झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों एक बड़े रणक्षेत्र में तब्दील हो चुकी है, जहां अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे युवाओं और प्रशासन के बीच टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। सरकार और व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे छात्र-छात्राओं के रास्ते में प्रशासन ने सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए हैं जिन्हें देखकर हर कोई हैरान है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सड़कों पर भारी-भरकम पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ जगह-जगह कंटीले तार बिछा दिए गए हैं, वाटर कैनन तैयार रखे गए हैं और स्थिति बेकाबू होने पर आंसू गैस के गोले छोड़ने की नौबत आ रही है। आखिर सवाल यह उठता है कि अपनी भविष्य की मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इन छात्रों पर इतनी भीषण प्रशासनिक सख्ती क्यों बरती जा रही है?
छावनी में बदली रांची की सड़कें और सुरक्षा के भारी-भरकम इंतजाम
राजधानी के मुख्य मार्गों और विधानसभा के आसपास के इलाकों को पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी कर दी गई है कि परिंदा भी पर न मार सके। बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश कर रहे युवाओं को रोकने के लिए पुलिस पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही है। प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए यह सख्ती जरूरी थी, लेकिन दूसरी तरफ सड़कों पर उतरे छात्रों का कहना है कि सरकार उनकी आवाज को दबाने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है और पुलिस बल का डर दिखाकर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने की कोशिश की जा रही है।
बढ़ती नाराजगी और सियासी गलियारों में सुलगता उबाल
प्रशासन द्वारा अपनाई गई इस कड़ी कार्रवाई के बाद से राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। विपक्ष लगातार सत्ताधारी दल पर हमलावर है और यह सवाल पूछ रहा है कि क्या अपनी बात रखना इस देश में गुनाह हो गया है? छात्रों के इस आंदोलन और पुलिस की सख्ती के बीच अब आम जनता और अभिभावकों के मन में भी कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जैसे-जैसे हालात तनावपूर्ण होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे यह पूरा प्रकरण राज्य सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।