पशुओं के लिए वरदान 'शालिहोत्र एक्सप्रेस': अब एक फोन कॉल पर मिलेगी मुफ्त मेडिकल मदद
देशभर में बेजुबान मवेशियों और ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों के लिए एक बेहद राहतभरी और कल्याणकारी खबर सामने आई है। अक्सर देखा जाता है कि समय पर इलाज न मिलने या पशु चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इसी समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए एसबीआई फाउंडेशन (SBI Foundation) ने एक बेहद सराहनीय और अनूठी पहल की शुरुआत की है, जिसका नाम 'शालिहोत्र एक्सप्रेस' (Shalihotra Express) रखा गया है। इस खास मोबाइल वैन सेवा के जरिए अब किसानों और पशुपालकों को अपने बीमार या घायल पशुओं के इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि महज एक सिंगल कॉल करते ही डॉक्टरों की टीम मुफ्त मदद लेकर सीधे उनके दरवाजे पर पहुंच जाएगी।
क्या है 'शालिहोत्र एक्सप्रेस' और कैसे काम करती है यह सेवा?
एसबीआई फाउंडेशन द्वारा शुरू की गई 'शालिहोत्र एक्सप्रेस' एक चलती-फिरती अत्याधुनिक पशु चिकित्सा क्लीनिक (Mobile Veterinary Clinic) है। इस गाड़ी में पशुओं के इलाज से जुड़ी तमाम आधुनिक मशीनें, जीवन रक्षक दवाइयां और अनुभवी पशु चिकित्सकों व कंपाउंडर्स की एक पूरी टीम मौजूद रहती है। इस सेवा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूर-दराज के उन इलाकों तक तुरंत स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है जहां पक्के पशु अस्पताल मीलों दूर होते हैं। जैसे ही कोई पशुपालक इस सेवा के लिए निर्धारित हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करता है, वैसे ही यह वैन तुरंत हरकत में आती है और कुछ ही समय में पशु के घर या खेत पर पहुंचकर उसका मुफ्त इलाज शुरू कर देती है।
पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं यह योजना
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मवेशी सिर्फ जीव नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका का अहम हिस्सा होते हैं। ऐसे में पशुओं के बीमार होने पर आने वाला मोटा खर्च और समय पर इलाज न मिलना किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता था। 'शालिहोत्र एक्सप्रेस' के आने से न सिर्फ बेजुबानों को समय पर बेहतरीन चिकित्सा मिल रही है, बल्कि गरीब किसानों को महंगे इलाज के बोझ से भी बड़ी राहत मिल रही है। फाउंडेशन की इस पहल की चौतरफा सराहना हो रही है, और यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में इसका दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा ताकि देश के हर कोने तक बेजुबानों को यह जीवनरक्षक सुविधा मिल सके।