बारिश के बाद स्वर्ग सा दिख रहा पारसनाथ पर्वत, मानसून के बादलों के बीच तपस्या स्थली के दर्शन, आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम
झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित जैन धर्मावलंबियों का सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल 'पारसनाथ पर्वत' (सम्मेद शिखरजी) इन दिनों आस्था के साथ-साथ अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र बना हुआ है। मानसून की हालिया झमाझम बारिश के बाद इस पावन पर्वत की रंगत पूरी तरह बदल गई है। चारों तरफ फैली हरी-भरी वादियों और पर्वत चोटियों को छूकर गुजरते सफेद बादलों के बीच इस पावन तपस्या स्थली का नजारा ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो साक्षात स्वर्ग धरती पर उतर आया हो। दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु और प्रकृति प्रेमी इस मनमोहक दृश्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो रहे हैं।
बादलों की चादर में लिपटा सम्मेद शिखरजी का गर्भगृह
समुद्र तल से करीब 4431 फीट की ऊंचाई पर स्थित पारसनाथ की सबसे ऊंची चोटी इन दिनों पूरी तरह से घने कोहरे और मानसूनी बादलों की आगोश में है। सुबह के समय जब सूर्य की पहली किरणें इन बादलों को चीरकर जैन तीर्थंकरों के टोंकों (चरण चिन्हों) पर पड़ती हैं, तो वहां का आध्यात्मिक माहौल और भी अलौकिक हो जाता है। पर्वत की वंदना करने के लिए नौ किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि थकावट के बीच जब ठंडी हवाओं के झोंके और बादलों की फुहारें उन्हें छूती हैं, तो सारी शारीरिक परेशानियां पल भर में गायब हो जाती हैं और मन भक्ति रस में डूब जाता है।
जैन समाज की इस पावन तपस्या स्थली का धार्मिक महत्व
पारसनाथ पर्वत को जैन धर्म में मुक्ति का द्वार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से भगवान पारसनाथ समेत कुल 20 तीर्थंकरों ने इसी पावन पर्वत पर कठोर तपस्या कर मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त किया था। यही कारण है कि इस पर्वत के कण-कण को पूजनीय माना जाता है। मानसून के मौसम में यहां की शांति, पवित्रता और अलौकिक ऊर्जा दोगुनी हो जाती है। बारिश के कारण पहाड़ों से बहते छोटे-छोटे प्राकृतिक झरने और वनस्पतियां इस अध्यात्मिक केंद्र के सौंदर्य में चार चांद लगा रहे हैं, जिससे यहां का इको-सिस्टम बेहद जीवंत हो उठा है।
स्थानीय पर्यटन को मिला बूस्ट, लेकिन प्रशासन ने जारी की गाइडलाइन
पारसनाथ का यह बदला हुआ रूप सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोर रहा है, जिसके चलते गिरिडीह, मधुबन और आस-पास के स्थानीय इलाकों से लेकर पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार, बंगाल और ओडिशा से भी पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आमद अचानक बढ़ गई है। हालांकि, मानसूनी बारिश के कारण पहाड़ी रास्तों पर हल्की फिसलन और दृश्यता (Visibility) कम होने की वजह से स्थानीय प्रशासन और पारसनाथ थाना पुलिस ने गाइडलाइन जारी की है। तीर्थयात्रियों को सलाह दी गई है कि वे देर शाम या भारी बारिश के दौरान ऊंचे पहाड़ी रास्तों पर जाने से बचें और वंदना ट्रैक पर पूरी सावधानी बरतें।