झारखंड की नई छवि: 'सिर्फ खनिज नहीं, हमारी असली ताकत प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति', बोले मंत्री सुदिव्य कुमार

झारखंड की नई छवि: 'सिर्फ खनिज नहीं, हमारी असली ताकत प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति', बोले मंत्री सुदिव्य कुमार

झारखंड को अब तक देश में केवल 'खनिज संपदा' के हब के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन अब राज्य सरकार इस धारणा को बदलने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। हाल ही में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार ने झारखंड की पहचान को लेकर एक नया दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने कहा कि झारखंड केवल कोयला, लोहा और अन्य खनिजों की धरती नहीं है, बल्कि यहां की नैसर्गिक सुंदरता, घने जंगल, जलप्रपात और समृद्ध जनजातीय संस्कृति ही राज्य की असली विरासत और पहचान है।

पर्यटन बनेगा झारखंड की नई अर्थव्यवस्था का आधार

मंत्री सुदिव्य कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के विकास के लिए अब 'खनिज आधारित' अर्थव्यवस्था से हटकर 'पर्यटन आधारित' अर्थव्यवस्था की ओर रुख करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड के पास बेतहाशा प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनका सही तरीके से प्रचार-प्रसार और बुनियादी ढांचा विकसित करके दुनिया के मानचित्र पर राज्य को एक प्रमुख टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार इको-टूरिज्म और रूरल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां बना रही है, जिससे न केवल राज्य का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर को सहेजने का संकल्प

अपने संबोधन के दौरान मंत्री ने झारखंड की कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि राज्य की विकास यात्रा ऐसी होनी चाहिए जिसमें आधुनिकता तो हो, लेकिन अपनी जड़ों और प्राकृतिक धरोहरों के साथ समझौता न हो। उन्होंने स्थानीय जनता से अपील की कि वे अपनी प्राकृतिक संपदाओं को सुरक्षित रखें और राज्य को एक 'ग्रीन और क्लीन' डेस्टिनेशन बनाने में सरकार का सहयोग करें। मंत्री के इस बयान को राज्य की नई ब्रांडिंग और मार्केटिंग रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य झारखंड को खनिज के बाहर एक सकारात्मक और खूबसूरत छवि देना है।

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