रांची के छात्रों के समर्थन में उतरे सांसद निशिकांत दुबे: JPSC-JSSC विवाद पर करेंगे भूख हड़ताल
झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है, और अब इस आंदोलन की गूंज देश की राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंच चुकी है। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ अब भारतीय जनता पार्टी के तेजतर्रार और बेबाक सांसद निशिकांत दुबे खुलकर मैदान में उतर आए हैं। छात्रों के इस बड़े आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए सांसद निशिकांत दुबे ने ऐलान किया है कि वे झारखंड के युवाओं के हक की लड़ाई लड़ने के लिए जल्द ही भूख हड़ताल पर बैठेंगे। इस बड़े राजनीतिक कदम से पहले उन्होंने अपनी पार्टी के उच्च नेतृत्व से इसके लिए औपचारिक रूप से अनुमति मांग ली है, जिससे झारखंड की सियासत मेंवानर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं।
क्यों उठाया निशिकांत दुबे ने इतना बड़ा कदम और क्या हैं छात्रों की मुख्य मांगें?
झारखंड के युवा पिछले काफी समय से जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं के रिजल्ट, समय पर परीक्षा कराने और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। छात्रों के इसी दर्द को साझा करते हुए सांसद निशिकांत दुबे ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि झारखंड के युवाओं के साथ लगातार धोखा किया जा रहा है और राज्य की वर्तमान व्यवस्था योग्य छात्रों के सपनों को कुचलने का काम कर रही है। छात्रों पर हो रहे लाठीचार्ज और उनकी जायज मांगों को अनसुना किए जाने से आहत होकर ही सांसद ने अब गांधीवादी तरीके से आमरण अनशन या भूख हड़ताल करने का मन बनाया है ताकि सरकार की नींद खोली जा सके।
पार्टी से मंजूरी मिलने के बाद झारखंड की राजनीति में मचेगा बड़ा भूचाल
निशिकांत दुबे के इस तीखे और आक्रामक तेवर ने झारखंड के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बीजेपी हाईकमान उन्हें इस भूख हड़ताल की अनुमति दे देता है, तो यह राज्य सरकार के लिए एक बहुत बड़ी मुसीबत बन जाएगा। स्थानीय स्तर पर छात्र संगठनों और युवाओं के बीच इस कदम से सांसद की पैठ और मजबूत होगी, साथ ही आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका गहरा असर देखने को मिलेगा। फिलहाल, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस संवेदनशील मामले पर क्या फैसला लेता है और क्या रांची की सड़कों पर एक नया और बड़ा राजनीतिक संग्राम छिड़ने वाला है।