मंत्रियों से नहीं, सीधे सीएम से होगी बात', जेपीएससी अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने रखी अपनी कड़े शर्तें; मचा हड़कंप

मंत्रियों से नहीं, सीधे सीएम से होगी बात', जेपीएससी अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने रखी अपनी कड़े शर्तें; मचा हड़कंप

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोशित छात्रों का गुस्सा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न मांगों और अनियमितताओं के विरोध में सड़कों पर उतरे छात्रों ने प्रशासन और सरकार के सामने अपनी शर्तें रखकर सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। आंदोलनरत छात्रों ने दो टूक शब्दों में ऐलान कर दिया है कि उनकी समस्याओं का समाधान अब किसी भी मंत्री या मध्यम वर्गीय अधिकारी के जरिए नहीं होगा, बल्कि उनकी सीधी और आर-पार की बातचीत सीधे राज्य के मुख्यमंत्री (CM) के साथ ही होगी। राजधानी रांची से लेकर पूरे राज्य में छात्रों के इस तीखे तेवर और उग्र प्रदर्शन के बाद से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और पुलिस-प्रशासन के अधिकारी हालात को संभालने के लिए लगातार रणनीतिक बैठकें कर रहे हैं।

छात्रों का फूटा गुस्सा, बोले- मंत्रियों के आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा

प्रदर्शन कर रहे जेपीएससी अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले लंबे समय से वे अपनी जायज मांगों को लेकर अधिकारियों और मंत्रियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन और तारीखें ही मिल रही हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और चयन प्रक्रिया में देरी के कारण उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। यही वजह है कि इस बार छात्र किसी भी तरह के झूठे वादों के झांसे में आने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सूबे के मुखिया यानी मुख्यमंत्री खुद सामने आकर उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक उनका यह आंदोलन और विरोध प्रदर्शन इसी तरह शांतिपूर्ण लेकिन मजबूती के साथ जारी रहेगा।

प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती, सुरक्षा और कानून व्यवस्था के कड़े इंतजाम

छात्रों के इस अल्टीमेटम और कड़े रुख के बाद स्थानीय प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ गई है। प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। प्रशासनिक अधिकारी लगातार छात्र नेताओं से संपर्क साधकर मामले को शांत कराने और बातचीत के टेबल पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन छात्र अपनी इस जिद पर अड़े हैं कि वे अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री के सामने ही रखेंगे। झारखंड के राजनीतिक हलकों में भी इस छात्र आंदोलन को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, क्योंकि आने वाले दिनों में यह मुद्दा सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

 

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