झारखंड में ईडी का बड़ा धमाका! शराब घोटाले में पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव और बेटे रोहित को समन, सियासत गर्माई
झारखंड के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के बहुचर्चित और करोड़ों रुपये के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए झारखंड के पूर्व कांग्रेस नेता व कैबिनेट मंत्री रामेश्वर उरांव और उनके बेटे रोहित उरांव को आधिकारिक समन जारी कर दिया है। ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के बाद से राज्य की राजनीति में अचानक भूचाल आ गया है और कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया है।
करोड़ों के इस शराब सिंडिकेट में ईडी का कड़ा शिकंजा
ईडी की यह कार्रवाई झारखंड में हुए उस कथित शराब घोटाले से जुड़ी है, जिसमें सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने और अवैध रूप से धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के गंभीर आरोप लगे हैं। इससे पहले भी जांच एजेंसी ने पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव के ठिकानों सहित उनके करीबियों के यहां छापेमारी की थी, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत हाथ लगे थे। अब इन्हीं सबूतों और बयानों के आधार पर ईडी ने पिता-पुत्र की जोड़ी को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने के लिए रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में तलब किया है।
रोहित उरांव के व्यावसायिक कनेक्शन खंगाल रही जांच एजेंसी
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पूर्व मंत्री के बेटे रोहित उरांव के कुछ ऐसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और शराब कारोबारियों से सीधे वित्तीय संबंध होने के इनपुट ईडी को मिले हैं, जो इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य केंद्र बिंदु थे। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर चहेते सप्लायरों को फायदा पहुंचाया गया था और क्या उस पैसे को मुखौटा कंपनियों (शेल कंपनियों) के जरिए रूट किया गया था। इस समन के बाद रोहित उरांव की मुश्किलें काफी बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।
विपक्ष हमलावर, चुनावी माहौल के बीच बढ़ा सियासी पारा
झारखंड में इस हाई-प्रोफाइल समन के बाद राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है। विपक्षी दलों ने सरकार और पूर्व मंत्रियों को घेरते हुए इसे भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत बताया है, वहीं सत्तापक्ष का आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक द्वेष की भावना से किया जा रहा है। बहरहाल, ईडी के दफ्तर में होने वाली इस आगामी पूछताछ पर पूरे झारखंड की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस पूछताछ से निकलने वाले तथ्य राज्य की राजनीति की दिशा और दशा तय कर सकते हैं।