हेमंत सरकार की सड़क योजनाओं पर केंद्र का कड़ा रुख: हजारीबाग-बगोदर समेत कई बड़े रोड प्रोजेक्ट्स रिजेक्ट
झारखंड में आधारभूत संरचना और विकास कार्यों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनातनी एक बार फिर सतह पर आ गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हेमंत सोरेन सरकार की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के प्रस्तावों को खारिज (Reject) कर दिया है। अस्वीकृत की गई इन प्रमुख योजनाओं में बहुप्रतीक्षित हजारीबाग-बगोदर सड़क परियोजना के साथ-साथ अन्य कई भारी-भरकम लागत वाले मार्ग भी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने इन प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी देने से इनकार करते हुए मुख्य रूप से समय पर भूमि उपलब्ध न होने और प्रशासनिक स्तर पर हुई देरी को इसके पीछे की बड़ी वजह बताया है।
किन बड़ी परियोजनाओं पर चला केंद्र का चाबुक?
केंद्रीय मंत्रालय के इस फैसले से राज्य की कई अहम सड़कों के निर्माण का रास्ता अधर में लटक गया है। जिन प्रमुख योजनाओं को रिजेक्ट किया गया है, उनमें हजारीबाग-बगोदर सड़क परियोजना के अलावा हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराईबुरू सड़क और एनएच-6 पर स्थित चाईबासा-हाटगम्हरिया सड़क पर प्रस्तावित आरओबी (ROB) का निर्माण कार्य शामिल है। केंद्र सरकार का स्पष्ट कहना है कि इन परियोजनाओं के लिए तय समय सीमा के भीतर जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सका, फॉरेस्ट क्लियरेंस मिलने में अड़चनें आईं और तकनीकी स्वीकृतियां भी समय पर पूरी नहीं की गईं, जिसके चलते इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाना संभव नहीं था।
पेनल्टी और अधिकार क्षेत्र को लेकर आमने-सामने आए केंद्र और राज्य
परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और निर्धारित शर्तों का अनुपालन न होने का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्रालय ने राज्य के पथ निर्माण विभाग पर आर्थिक दंड (Penalty) भी लगाया है। इस कार्रवाई के बाद से राज्य सरकार और केंद्रीय मंत्रालय के बीच विवाद और अधिक गहरा गया है। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने केंद्र की इस पेनल्टी पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि केंद्रीय मंत्रालय के पास राज्य सरकार के विभागों पर इस तरह का आर्थिक दंड लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, जो सीधे तौर पर केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों की खींचतान को दर्शाता है।
कंटीजेंसी फंड रोकने का गंभीर आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच झारखंड के पथ निर्माण विभाग ने केंद्र सरकार पर आपातकालीन यानी कंटीजेंसी फंड का भुगतान रोकने का भी गंभीर आरोप लगाया है। विभाग का कहना है कि समय पर राशि न मिलने के कारण सड़क परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय प्रबंधन और आंतरिक व्यवस्थाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। राज्य सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्रालय को आधिकारिक पत्र भेजकर बकाया कंटीजेंसी राशि को जल्द से जल्द जारी करने की मांग की गई है, ताकि अटके हुए कार्यों के वित्तीय संतुलन को दुरुस्त किया जा सके।
पहले मंजूर प्रोजेक्ट्स और मौजूदा स्थिति पर असर
गौरतलब है कि इससे पहले भी केंद्र सरकार द्वारा झारखंड में कई सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी जा चुकी है, लेकिन ताजा प्रस्तावों के खारिज होने से राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास को झटका लगा है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते जमीन अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लियरेंस से जुड़े मामलों का स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में अन्य केंद्रीय परियोजनाओं के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं। फिलहाल, राज्य सरकार इस पूरी स्थिति से निपटने और केंद्र के साथ संवाद स्थापित कर रुकी हुई राशि को जारी कराने के विकल्पों पर विचार कर रही है।