यह है चमत्कारी वन तुलसी! जानिए इसके अचूक औषधीय गुण, सेवन का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

यह है चमत्कारी वन तुलसी! जानिए इसके अचूक औषधीय गुण, सेवन का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

हमारे देश के लगभग हर आंगन और बगीचे में पूजी जाने वाली तुलसी के पौधे से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सामान्य तुलसी के अलावा एक और खास प्रजाति पाई जाती है जिसे 'वन तुलसी' (Wild Basil) कहा जाता है? औषधीय गुणों के मामले में यह जंगली तुलसी किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती है। जंगलों, खेतों की मेड़ों और खुले मैदानों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली यह वन तुलसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और आयुर्वेद में एक विशेष स्थान रखती है। इसके पत्तों और बीजों में छुपे हुए स्वास्थ्यवर्धक गुणों के बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे, आइए इसके फायदों और इस्तेमाल के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या होती है वन तुलसी और क्यों है यह सामान्य तुलसी से अलग

सामान्य तौर पर हमारे घरों में जो तुलसी पाई जाती है, उसे रामा या श्यामा तुलसी कहा जाता है, जिसकी लोग रोजाना पूजा करते हैं। इसके विपरीत, वन तुलसी ज्यादातर जंगली और प्राकृतिक वातावरण में खुद-ब-खुद पनपती है। इसके पौधे की पत्तियां थोड़ी अलग बनावट की होती हैं और इसमें एक बहुत ही तीव्र और तेज सुगंध पाई जाती है। आयुर्वेद के जानकारों का मानना है कि वन तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सामान्य तुलसी की तुलना में कई गुना अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को तेजी से मजबूत करने का काम करते हैं।

अचूक औषधीय गुण और बीमारियों से लड़ने की ताकत

वन तुलसी के नियमित और संतुलित सेवन से कई तरह की मौसमी और अंदरूनी बीमारियों से राहत मिलती है। सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और गले के संक्रमण में इसकी पत्तियों का काढ़ा बेहद असरदार माना गया है। इसके अलावा, त्वचा से जुड़ी समस्याओं जैसे दाद, खाज, खुजली और फोड़े-फुंसियों पर इसकी पत्तियों का रस लगाने से जल्द आराम मिलता है। यह शरीर में मौजूद हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर खून को साफ करने का काम भी करती है। जिन लोगों को अक्सर पाचन से जुड़ी समस्याएं रहती हैं, उनके लिए भी वन तुलसी का अर्क या चाय रामबाण साबित हो सकती है।

सेवन का सही तरीका और बरतने वाली जरूरी सावधानियां

किसी भी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी की तरह वन तुलसी का इस्तेमाल भी हमेशा सही मात्रा में ही करना चाहिए। इसकी तासीर काफी गर्म होती है, इसलिए गर्मियों के दिनों में या पित्त प्रकृति वाले लोगों को इसका सेवन बहुत सीमित मात्रा में करना चाहिए। आप इसकी ताजी पत्तियों को पानी में उबालकर काढ़ा बना सकते हैं या चाय में इसका उपयोग कर सकते हैं। गर्भवती महिलाओं या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर या किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह के बिना इसके सेवन से बचना चाहिए। सही तरीके से इस्तेमाल की गई यह वन तुलसी सेहत के लिए एक कुदरती खजाना साबित हो सकती है।

 

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