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Paranoia Symptoms & Causes: कहीं आप भी तो नहीं हैं पैरानोइया के शिकार? दोस्तों के मजाक पर आता है गुस्सा, तो हो जाएं सावधान

कुछ लोग ऑफिस, स्कूल, कॉलेज या समाज में दोस्तों और सहकर्मियों के साथ होने वाली बेहद छोटी और सामान्य बातों पर भी लंबे समय तक गुस्सा पाल लेते हैं। किसी की तरफ से किया गया एक साधारण सा कमेंट या दोस्ताना मजाक भी उन्हें ऐसा महसूस कराता है कि लोग उन्हें जानबूझकर टारगेट कर रहे हैं। धीरे-धीरे यह शक इतना गहरा हो जाता है कि व्यक्ति को लगने लगता है कि हर कोई उसके खिलाफ कोई साजिश रच रहा है या उसे नुकसान पहुंचाना चाहता है।

अगर कोई व्यक्ति हर बात को जरूरत से ज्यादा गंभीरता से लेता है, दूसरों की सहज बातों पर भी आक्रामक या रक्षात्मक (Defensive) तरीके से रिएक्ट करता है, तो यह केवल सामान्य गुस्सा नहीं, बल्कि पैरानोइया (Paranoia) का शुरुआती संकेत हो सकता है। इस मानसिक स्थिति के कारण व्यक्ति धीरे-धीरे सामाजिक दूरी बनाने लगता है, लोगों से बात करने में कतराता है और अपना ज्यादातर समय अकेले बिताना पसंद करने लगता है। आइए जानते हैं कि यह समस्या क्या है, इसके कारण और लक्षण क्या हैं और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पैरानोइया (Paranoia) क्या है?

प्रसिद्ध मेडिकल संस्थान क्लीवलैंड क्लीनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, जब कोई व्यक्ति बिना किसी ठोस सबूत, आधार या कारण के दूसरों पर लगातार यह शक करने लगे कि वे उसके खिलाफ हैं, उसका बुरा चाहते हैं या उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं, तो सोचने की इस गंभीर स्थिति को पैरानोइया कहा जाता है।

यह विचार और अविश्वास की भावना इतनी तीव्र होती है कि व्यक्ति इसे ही अपनी असल सच्चाई मान बैठता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि साइकोसिस (Psychosis - मानसिक भ्रम) से पीड़ित लगभग 70 फीसदी से अधिक लोगों में पैरानोइया के लक्षण मुख्य रूप से दिखाई देते हैं। इसमें व्यक्ति उन बातों या अफवाहों को भी सच मानकर भ्रम (Delusion) में जीने लगता है, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता।

पैरानोइया होने के मुख्य कारण क्या हैं?

चिकित्सा विज्ञान और शोध के अनुसार, पैरानोइया के पीछे कई जैविक, मनोवैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारण हो सकते हैं:

  • आनुवंशिक कारण (Genetics): अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NCBI) के शोध बताते हैं कि जिन परिवारों में पहले से ही किसी को मानसिक अस्वस्थता या साइकोसिस की समस्या रही हो, उनकी अगली पीढ़ी में पैरानोइया होने का जोखिम बढ़ जाता है।

  • न्यूरोट्रांसमीटर में बदलाव: मस्तिष्क के भीतर रासायनिक संदेशवाहक यानी न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे डोपामाइन) के स्तर में उतार-चढ़ाव होने से दिमाग तक जाने वाले संकेत, भावनाएं और विचार पूरी तरह प्रभावित हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति का वास्तविकता से नियंत्रण छूटने लगता है।

  • बचपन का आघात (Childhood Trauma): 'जर्नल ऑफ साइकोसिस एंड रिलेटेड डिसऑर्डर्स' के मुताबिक, यदि किसी बच्चे को स्कूल या पड़ोस में अन्य बच्चों द्वारा अत्यधिक बुली (Bully) किया गया हो, शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया हो या हर बात पर नीचा दिखाया गया हो, तो बड़े होकर उसमें पैरानोइया विकसित होने की आशंका काफी ज्यादा होती है।

  • अत्यधिक तनाव (Chronic Stress): लंबे समय तक गंभीर मानसिक या आर्थिक तनाव में रहने के कारण भी मस्तिष्क की सोचने-समझने की कार्यप्रणाली नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है, जिससे मन में बेवजह के डर और अविश्वास पैदा होने लगते हैं।

पैरानोइया के 3 सबसे बड़े लक्षण

पैरानोइया की समस्या से ग्रसित व्यक्ति में मुख्य रूप से ये तीन लक्षण और व्यावहारिक बदलाव देखे जा सकते हैं:

1. किसी पर भी भरोसा न कर पाना

इस समस्या का सबसे प्राथमिक लक्षण है कि व्यक्ति अपने सबसे करीबी दोस्तों, परिवार के सदस्यों या जीवनसाथी पर भी आसानी से विश्वास नहीं कर पाता। उसे हमेशा यही संदेह रहता है कि पीठ पीछे लोग उसके खिलाफ योजनाएं बना रहे हैं या उसका अहित करने की फिराक में हैं।

2. छोटी-छोटी बातों का बहुत जल्दी बुरा मान जाना

ऐसा व्यक्ति किसी भी स्वस्थ आलोचना, सलाह या सामान्य हंसी-मजाक को सहन नहीं कर पाता। वह हर बात को अपने आत्मसम्मान और अपमान से जोड़कर देखने लगता है। इसके कारण वह हमेशा चिड़चिड़ा, तनावग्रस्त और लोगों से नाराज रहता है।

3. हर बात का नकारात्मक अर्थ निकालना

पैरानोइया से पीड़ित मरीज हमेशा दूसरों के अच्छे इरादों में भी खोट ढूंढता है। उसे लगता है कि सामने वाला उसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। बिना किसी ठोस आधार के वह मनगढ़ंत साजिशों को सच मान लेता है और छोटी सी बात पर भी अचानक बहुत उग्र प्रतिक्रिया (Overreact) दे देता है।

गंभीर स्थिति होने पर डॉक्टर या साइकियाट्रिस्ट के पास कब जाएं?

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Mental Health Experts) का स्पष्ट कहना है कि यदि अविश्वास, अत्यधिक शक और अकेले रहने की यह आदत बार-बार महसूस हो रही हो और इसके कारण व्यक्ति की नौकरी, पढ़ाई, पारिवारिक रिश्ते और रोजमर्रा की सामान्य जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होने लगे, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में बिना समय गंवाए तुरंत किसी योग्य मनोचिकित्सक (Psychiatrist) या क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट की मदद लेनी चाहिए।

बचाव और थेरेपी: पैरानोइया एक इलाज योग्य मानसिक स्थिति है। काउंसलिंग, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और गंभीर मामलों में दवाइयों की मदद से मरीज को इस भ्रम से पूरी तरह बाहर निकाला जा सकता है। इलाज में कितना समय लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी पुरानी और गंभीर है। इस समस्या के शुरुआती दौर में मानसिक शांति के लिए नियमित रूप से मेडिटेशन (ध्यान) करना, योग अपनाना, पर्याप्त नींद लेना और अपने विश्वसनीय दोस्तों व परिवार के साथ मन के विचारों को खुलकर शेयर करना बेहद फायदेमंद साबित होता है।

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