उम्र से पहले घट रही है मांसपेशियों की ताकत? जानें क्या है सारकोपेनिया (Sarcopenia) और क्यों बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा
अक्सर हम मांसपेशियों के नुकसान और कमजोरी को केवल बुढ़ापे की समस्या मानते हैं। लेकिन आजकल की अस्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और खराब खान-पान के कारण कम उम्र के युवाओं में भी मसल्स लॉस (Muscle Loss) की समस्या तेजी से देखी जा रही है। चिकित्सा विज्ञान में मांसपेशियों के घटने और उनकी ताकत कम होने की इस स्थिति को सारकोपेनिया (Sarcopenia) कहा जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि सारकोपेनिया न केवल शरीर को शारीरिक रूप से कमजोर बनाता है, बल्कि यह कम उम्र में ही टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 Diabetes) और मेटाबॉलिक विकारों का बड़ा कारण बन रहा है। आइए एक हेल्थ रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि सारकोपेनिया क्या है, इसके खतरे और इससे बचाव के उपाय क्या हैं।
कम उम्र में क्यों हो रहा है सारकोपेनिया? जानें मुख्य कारण
आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद प्रति दशक 3% से 8% तक मांसपेशियां प्राकृतिक रूप से घटने लगती हैं। लेकिन आजकल 20 से 30 साल के युवाओं में भी यह समस्या देखी जा रही है, जिसके मुख्य कारण हैं:
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सेडेंटरी लाइफस्टाइल (घंटों बैठे रहना): शारीरिक गतिविधि न करने और लगातार डेस्क जॉब में घंटों बैठे रहने से मांसपेशियां निष्क्रिय होकर कमजोर होने लगती हैं।
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प्रोटीन और पोषण की कमी: आहार में पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन-डी और बी-12 की कमी के कारण मांसपेशियां अपना घनत्व (Mass) खोने लगती हैं।
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अत्यधिक तनाव और नींद की कमी: क्रोनिक स्ट्रेस से शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है, जो मसल टिश्यू को तोड़ता है।
सारकोपेनिया और डायबिटीज का क्या है आपस में कनेक्शन?
सारकोपेनिया और टाइप-2 डायबिटीज का आपस में गहरा और सीधा संबंध है:
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इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): हमारे शरीर में लगभग 80% ग्लूकोज (शर्करा) की खपत हमारी मांसपेशियों (Skeletal Muscles) द्वारा की जाती है। जब मांसपेशियों का द्रव्यमान कम हो जाता है, तो शरीर ग्लूकोज को सही तरीके से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता।
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ब्लड शुगर का बढ़ना: मांसपेशियों की कमी के कारण खून में शुगर का स्तर बना रहता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और व्यक्ति कम उम्र में ही टाइप-2 डायबिटीज का शिकार हो जाता है।
सारकोपेनिया के शुरुआती लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज
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थोड़ा सा सामान उठाने या सीढ़ियां चढ़ने में अत्यधिक थकान और कमजोरी होना।
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बिना किसी बड़े कारण के अचानक शरीर का वजन और शारीरिक क्षमता कम होना।
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बार-बार संतुलन बिगड़ना, जोड़ों में दर्द या चलने की गति धीमी होना।
सारकोपेनिया से बचने के 4 अचूक उपाय
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डाइट में बढ़ाएं प्रोटीन: अपने दैनिक आहार में दालें, पनीर, अंडे, अंकुरित अनाज, सोयाबीन और नट्स जैसे प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कसरत: हफ्ते में कम से कम 3 से 4 दिन रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (वेट लिफ्टिंग), योग या बॉडीवेट एक्सरसाइज जरूर करें।
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विटामिन-डी की खुराक: धूप में समय बिताएं या डॉक्टर की सलाह से विटामिन-डी3 सप्लीमेंट लें, क्योंकि यह मांसपेशियों के फंक्शन को मजबूत करता है।
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पर्याप्त नींद और स्क्रीन टाइम कंट्रोल: रोजाना 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लें ताकि मसल्स रिकवरी सही तरीके से हो सके।