Monsoon Diet Rules: बारिश के मौसम में इन 5 चीजों को खाने से पेट में बन सकता है 'आग का गोला', 2 महीने तक तुरंत कर लें तौबा!

Monsoon Diet Rules: बारिश के मौसम में इन 5 चीजों को खाने से पेट में बन सकता है 'आग का गोला', 2 महीने तक तुरंत कर लें तौबा!

बारिश की हल्की बूंदाबांदी और सुहावना मौसम हर किसी के मन को भाता है। लेकिन, सेहत और पाचन के लिहाज से यह मौसम सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। मानसून के दौरान हवा में नमी (Humidity) बढ़ने के कारण हानिकारक बैक्टीरिया, फंगस और वायरस बहुत तेजी से पनपते हैं, जिससे हमारा मेटाबॉलिज्म (चयापचय) धीमा हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि हम अपने खान-पान के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही बरतते हैं, तो पेट में गैस, एसिडिटी, भारीपन और ऐंठन का ‘आग का गोला’ बन जाता है, जिसे संभालना मुश्किल हो जाता है। अगर आप अगले 2 महीने खुद को डॉक्टर और अस्पताल के चक्कर काटने से बचाना चाहते हैं, तो तुरंत इन 5 चीजों से तौबा कर लें।

1. समोसे, पकौड़े और अत्यधिक तली-भुनी चीज़ें

बारिश की फुहारें शुरू होते ही सबसे पहले दिमाग में चाय के साथ गरमा-गरम पकौड़े, समोसे या कचौड़ी खाने का ख्याल आता है। लेकिन, वास्तु और सेहत दोनों के लिहाज से इस मौसम में ऐसी भारी चीजें नुकसानदेह हैं। धीमे मेटाबॉलिज्म के कारण मानसून में हैवी और ऑयली फूड को पचाना आंतों के लिए बेहद मुश्किल होता है। इससे गंभीर एसिड रिफ्लक्स (सीने में तेज जलन), पेट में भारीपन और अपच की समस्या तुरंत घेर लेती है।

2. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां (पालक, पत्तागोभी आदि)

आमतौर पर हरी पत्तेदार सब्जियों को सेहत का खजाना माना जाता है, लेकिन मानसून में ये आपके लिए किसी बड़े इन्फेक्शन का कारण बन सकती हैं। बारिश के दिनों में पालक, पत्तागोभी और मेथी जैसी सब्जियों की परतों के बीच नमी के कारण कीटाणु, छोटे कीड़े और बैक्टीरिया तेजी से घर बना लेते हैं। इन्हें ठीक से न धोने या खाने से फूड पॉइजनिंग, पेट का गंभीर इन्फेक्शन और पेट में तेज मरोड़ उठने का खतरा रहता है।

3. स्ट्रीट फ़ूड और गोलगप्पे (पुचके)

इस मौसम में सड़क किनारे मिलने वाले गोलगप्पे का तीखा-खट्टा पानी, चाट और खुले में बिकने वाली चीजें सेहत के लिए सबसे बड़ा जोखिम हैं। स्ट्रीट वेंडर्स द्वारा अक्सर बिना ढके रखे जाने के कारण इन पर मक्खियां बैठती हैं, और गोलगप्पे के पानी में दूषित जल का इस्तेमाल होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। इसे खाने से टाइफाइड, पीलिया (जॉन्डिस), दस्त (डायरिया) और पेट में भयंकर मरोड़ जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

4. सीफ़ूड (मछली और समुद्री जीव)

बारिश का महीना मछली और अन्य समुद्री जीवों के लिए प्रजनन (Breeding Season) का समय होता है। इस दौरान बाजार में मिलने वाले सीफ़ूड के जरिए पेट के इन्फेक्शन और एलर्जी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, वाटर बॉडीज में गंदगी बढ़ने से मछलियों में टॉक्सिंस जमा हो जाते हैं। इसलिए, अगले दो महीनों तक नॉन-वेजिटेरियन फूड, विशेषकर सीफ़ूड से पूरी तरह दूरी बना लेना ही समझदारी है।

5. पहले से कटे हुए फल और अत्यधिक पानी वाले फल

बाजार या सड़क किनारे रेहड़ियों पर बिकने वाले पहले से कटे हुए फल कीटाणुओं और मूक बैक्टीरिया का सबसे बड़ा ठिकाना होते हैं। हवा के संपर्क में रहने से ये फल बहुत जल्दी दूषित हो जाते हैं। इसके साथ ही, इस मौसम में बहुत ज्यादा 'ठंडी तासीर' वाले और अत्यधिक पानी से भरपूर फलों का अधिक सेवन करने से पाचन तंत्र सुस्त पड़ जाता है, जिससे गैस और पेट फूलने (Bloating) की समस्या बढ़ जाती है।

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