दिल्ली-NCR में H1N1 स्वाइन फ्लू का भयंकर विस्फोट: 6 गुना बढ़े मामले, अस्पतालों में लगी मरीजों की कतार; जानिए लक्षण, हाई-रिस्क ग्रुप और बचाव के उपाय
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में मॉनसून के मौसम और लगातार बदलते तापमान के बीच H1N1 इन्फ्लूएंजा यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में अप्रत्याशित और तेज उछाल देखा जा रहा है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक राजधानी में H1N1 के 1,449 से अधिक पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
यह आंकड़ा पिछले वर्ष इसी समान अवधि में दर्ज किए गए महज 229 मामलों की तुलना में छह गुना से भी अधिक की चौंकाने वाली बढ़ोतरी को दर्शाता है। केवल राजधानी दिल्ली ही नहीं, बल्कि नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के सरकारी व निजी अस्पतालों की बाह्य रोगी विभाग (OPD) में भी तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश और बदन दर्द के मरीजों की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून में नमी और तापमान में आने वाले अचानक उतार-चढ़ाव के कारण इन्फ्लूएंजा वायरस का प्रसार वायुमंडल में अत्यधिक तेजी से हो रहा है।
अस्पतालों में विशेष आइसोलेशन वार्ड और वेंटिलेटर तैयार: स्वास्थ्य मंत्री का बयान
संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह सतर्क हो गया है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि राजधानी के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों—जैसे राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल, लोक नायक (LNJP) और गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल—में H1N1 और रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन के मरीजों के लिए अलग से विशेष आइसोलेशन वार्ड्स, समर्पित बेड्स, ऑक्सीजन सपोर्ट और वेंटिलेटर की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वस्त किया कि शहरभर में बड़े पैमाने पर स्वाइन फ्लू की रियल-टाइम आरटी-पीसीआर (RT-PCR) टेस्टिंग की जा रही है और आवश्यक दवाओं का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने जिला निगरानी इकाइयों (District Surveillance Units) को निर्देश दिए हैं कि वे क्लस्टर्स में आ रहे इन्फ्लूएंजा मामलों की दैनिक मॉनिटरिंग करें ताकि संक्रमण के सामुदायिक प्रसार को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
क्या हैं H1N1 स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण? सामान्य मौसमी जुकाम से कैसे है अलग?
इन्फ्लूएंजा-ए (H1N1) एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से ऊपरी और निचले श्वसन तंत्र (नाक, गला और फेफड़ों) को प्रभावित करती है। सामान्य सर्दी-जुकाम के मुकाबले इसके लक्षण अचानक और बहुत तीव्र गति से उभरते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, H1N1 के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
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101°F से 104°F तक लगातार बना रहने वाला तेज बुखार (High-Grade Fever) और ठंड लगना (Chills)।
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गले में तेज दर्द, खराश और निगलने में गंभीर परेशानी (Sore Throat)।
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लगातार सूखी और गंभीर खांसी (Dry Persistent Cough)।
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अत्यधिक थकान, सिरदर्द और मांसपेशियों व जोड़ों में असहनीय दर्द (Severe Body Ache & Myalgia)।
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नाक बहना या नाक का पूरी तरह बंद होना।
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कुछ मरीजों, विशेषकर बच्चों में उल्टी, मतली और दस्त (Diarrhea) के लक्षण।
यदि संक्रमण गंभीर रूप लेता है, तो मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ (Shortness of Breath), सीने में तेज दबाव या दर्द, होठों या नाखूनों का नीला पड़ना (Cyanosis) और ऑक्सीजन स्तर में अचानक गिरावट जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। ऐसी स्थिति में बिना देर किए तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा? को-मॉर्बिडिटी वाले मरीजों के लिए 'रेड अलर्ट'
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS नई दिल्ली) और सर गंगा राम अस्पताल के आंतरिक चिकित्सा (Internal Medicine) विशेषज्ञों का कहना है कि यद्यपि स्वस्थ युवा 4 से 6 दिनों के भीतर लक्षणात्मक उपचार और पर्याप्त आराम से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कमजोर इम्युनिटी और पहले से गंभीर बीमारियों (Co-morbidities) से जूझ रहे लोगों के लिए H1N1 जानलेवा साबित हो सकता है।
विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले समूह (High-Risk Groups):
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60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक और 5 वर्ष से कम उम्र के छोटे बच्चे।
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अनियंत्रित डायबिटीज (मधुमेह) और हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के मरीज।
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फेफड़ों की पुरानी बीमारियों जैसे अस्थमा (Asthma) और सीओपीडी (COPD) से पीड़ित व्यक्ति।
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क्रोनिक किडनी रोग (CKD), लिवर सिरोसिस या डायलिसिस पर चल रहे मरीज।
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हृदय रोग (हार्ट फेलियर या कोरोनरी आर्टरी डिजीज) के मरीज और गर्भवती महिलाएं।
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कैंसर, कीमोथेरेपी या ऑर्गन ट्रांसप्लांट के कारण कम इम्युनिटी वाले इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड मरीज।
इन श्रेणियों के मरीजों में स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से फेफड़ों में फैलकर वायरल निमोनिया, एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) और मल्टी-ऑर्गन फेलियर का कारण बन सकता है।
एंटीबायोटिक्स नहीं, सही समय पर एंटीवायरल दवा 'ओसेल्टामिविर' ही है कारगर
अपोलो और फोर्टिस अस्पताल के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट्स ने आम जनता को एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध और गलत इस्तेमाल के प्रति कड़ा आगाह किया है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि H1N1 एक वायरस जनित बीमारी है, इसलिए एजिथ्रोमाइसिन या ऑगमेंटिन जैसी एंटीबायोटिक दवाएं इस पर बिल्कुल काम नहीं करतीं।
स्वाइन फ्लू के उपचार के लिए एकमात्र प्रमाणित एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर (Oseltamivir / Tamiflu) है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस दवा का अधिकतम लाभ तभी मिलता है जब इसे लक्षण शुरू होने के शुरुआती 48 घंटों (First 48 Hours) के भीतर डॉक्टर की सलाह से शुरू कर दिया जाए। यह दवा वायरस के रेप्लिकेशन (प्रजनन) को रोकती है और मरीज को आईसीयू या वेंटिलेटर पर जाने से बचाती है। इसलिए बुखार और खांसी होने पर मेडिकल स्टोर से मनमाने ढंग से एंटीबायोटिक्स खरीदने के बजाय सीधे अधिकृत चिकित्सक से संपर्क कर स्वाइन फ्लू का टेस्ट करवाना अनिवार्य है।
बचाव के अचूक उपाय और दिशा-निर्देश: संक्रमण से खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (MoHFW) द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, दैनिक जीवन में कुछ बुनियादी सावधानियों का पालन करके H1N1 के संक्रमण की शृंखला को आसानी से तोड़ा जा सकता है:
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मास्क का नियमित प्रयोग: मेट्रो, बसों, रेलवे स्टेशनों, भीड़भाड़ वाले बाजारों और अस्पतालों में जाते समय ट्रिपल लेयर सर्जिकल मास्क या N95 मास्क अवश्य पहनें।
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हाथों की स्वच्छता (Hand Hygiene): बाहर से आने के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं या 70% अल्कोहल-बेस्ड हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
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चेहरे को बार-बार छूने से बचें: अपनी आंखों, नाक और मुंह को बिना धुले हाथों से छूने से बचें, क्योंकि इन्फ्लूएंजा का वायरस दूषित सतहों से इन्हीं रास्तों के जरिए शरीर में प्रवेश करता है।
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खांसी और छींकने का शिष्टाचार: खांसते या छींकते समय हमेशा मुंह और नाक को डिस्पोजेबल टिशू या रुमाल से ढकें और इस्तेमाल किए गए टिशू को ढक्कनदार डस्टबिन में फेंकें।
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होम आइसोलेशन: यदि किसी व्यक्ति में फ्लू के लक्षण दिखाई देते हैं, तो वह कम से कम 5 से 7 दिनों के लिए खुद को घर के एक अलग कमरे में आइसोलेट रखे और परिवार के बुजुर्गों व बच्चों के सीधे संपर्क में न आए।
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सालाना इन्फ्लूएंजा वैक्सीन (Flu Shot): उच्च जोखिम वाले समूहों, बुजुर्गों और स्वास्थ्यकर्मियों को डॉक्टरों की सलाह से सालाना क्वाड्रीवेलेंट इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगवानी चाहिए, जो H1N1 और H3N2 के गंभीर संक्रमण से मजबूत सुरक्षा प्रदान करती है।
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हाइड्रेशन और पौष्टिक आहार: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी, सूप, ताजे फल और विटामिन-सी युक्त आहार लें।
दिल्ली और एनसीआर में बदलते मौसम के दौरान स्वाइन फ्लू का यह उछाल एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती जरूर है, लेकिन समय पर जांच, सही एंटीवायरल उपचार और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूकता से इस बीमारी को पूरी तरह मात दी जा सकती है। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को भी लगातार तेज बुखार या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो बिना किसी लापरवाही के तुरंत निकटतम सरकारी या निजी स्वास्थ्य केंद्र पर परामर्श लें।