फैटी लिवर बन चुका है भारत का 'साइलेंट एपिडेमिक'! ग्रेड 1 से 3 तक के लक्षणों को न करें इग्नोर, एक्सपर्ट्स से जानें बचाव के उपाय

फैटी लिवर बन चुका है भारत का 'साइलेंट एपिडेमिक'! ग्रेड 1 से 3 तक के लक्षणों को न करें इग्नोर, एक्सपर्ट्स से जानें बचाव के उपाय

Fatty Liver Grade 1 2 3 Symptoms: आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खानपान के कारण 'फैटी लिवर' (Fatty Liver) भारत में एक महामारी (Silent Epidemic) का रूप ले चुका है. अंतर्राष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, दुनियाभर में लगभग एक अरब लोग इससे प्रभावित हैं, जबकि भारत में यह दर 9% से लेकर 32% तक देखी गई है. इसे मेडिकल भाषा में गैर-शराबी लिवर रोग (MASLD/NAFLD) कहा जाता है, जो धीरे-धीरे बिना किसी बड़े शोर के लिवर को अंदर से खोखला करता है.

मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और उच्च कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे लोगों के लिए फैटी लिवर के ग्रेड 1 से लेकर ग्रेड 3 तक की पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते इसका इलाज और इसे पूरी तरह रिवर्स (ठीक) किया जा सके.

ग्रेड 1 फैटी लिवर: शुरुआती चरण और अक्सर लक्षणहीन

फैटी लिवर ग्रेड 1 (या लाइट स्टेटोसिस) तब माना जाता है, जब लिवर की कुल कोशिकाओं के 5% से 33% हिस्से में वसा (Fats) जमा हो जाती है.

  • मुख्य लक्षण: दिल्ली के प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज धमीजा के अनुसार, इस शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. जातक को केवल हल्की थकान, कमजोरी या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में थोड़ा भारीपन महसूस हो सकता है, जिसे लोग अक्सर सामान्य गैस समझकर इग्नोर कर देते हैं.

  • कारण और जांच: इसका मुख्य कारण मोटापा, अनियंत्रित ट्राइग्लिसराइड्स और खराब खानपान है. डॉक्टर एक साधारण पेट के अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) और लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) के जरिए इसका पता लगाते हैं.

  • बचाव व इलाज: यह चरण पूरी तरह से रिवर्सिबल है. केवल जीवनशैली में सुधार करके, रिफाइंड चीनी और जंक फूड का त्याग कर और नियमित 30 मिनट व्यायाम करके इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.

ग्रेड 2 फैटी लिवर: मध्यम स्थिति और बढ़ता जोखिम

जब लिवर के 34% से 66% हिस्से में वसा जमा हो जाती है, तो उसे ग्रेड 2 फैटी लिवर की श्रेणी में रखा जाता है. इस चरण में लिवर का सामान्य कामकाज प्रभावित होने लगता है.

  • मुख्य लक्षण: डॉ. सौरभ सिंघल जैसे विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्टेज पर शरीर स्पष्ट चेतावनी देने लगता है. मरीज को भूख कम लगना, पेट में लगातार सूजन या ब्लोटिंग होना, अत्यधिक प्यास लगना और हर वक्त गंभीर थकावट बने रहने जैसे लक्षण महसूस होते हैं.

  • कारण और जांच: लगातार लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली सुस्त जीवनशैली, तला-भुना खाना और अनियंत्रित शुगर इसके मुख्य कारण हैं. इसकी गहराई नापने के लिए एलएफटी के साथ 'फाइब्रोस्कैन' (Fibroscan) या सीटी स्कैन कराया जाता है.

  • बचाव व इलाज: इस चरण में डॉक्टर मरीज को अपने कुल वजन का 7 से 10% तक कम करने की सख्त सलाह देते हैं. यदि इस स्टेज पर लापरवाही बरती जाए, तो यह तेजी से ग्रेड 3 में बदल जाता है.

ग्रेड 3 फैटी लिवर: गंभीर स्थिति और सिरोसिस का खतरा

यह फैटी लिवर की सबसे चरम और खतरनाक स्थिति है, जिसमें लिवर के 67% से भी अधिक हिस्से पर चर्बी की मोटी परत चढ़ जाती है.

  • मुख्य लक्षण: डॉ. नीरज धमीजा चेतावनी देते हैं कि ग्रेड 3 में लिवर में गंभीर सूजन आ जाती है. इसके लक्षणों में पेट में तेज दर्द, अचानक वजन का तेजी से गिरना, बार-बार मतली (उल्टी) आना, हाथ-पैरों में सूजन (एडिमा) और आंखों व त्वचा का पीला होना (पीलिया/Jaundice) शामिल हैं.

  • कारण और जांच: ग्रेड 1 और 2 के लक्षणों को लगातार नजरअंदाज करना, शराब का सेवन और अनियंत्रित डायबिटीज इसे खतरनाक स्तर पर ले जाते हैं. सटीक स्थिति जानने के लिए डॉक्टर लिवर बायोप्सी (Biopsy) की सलाह दे सकते हैं.

  • बचाव व इलाज: इस स्टेज पर केवल डाइट और एक्सरसाइज काफी नहीं होती, बल्कि डॉक्टर की सख्त दवाओं की जरूरत पड़ती है. लिवर डैमेज होने की स्थिति में 'लिवर ट्रांसप्लांट' (Liver Transplant) ही एकमात्र विकल्प बचता है. इसलिए, समय पर रेगुलर चेकअप कराना ही इससे बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है.

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