Dengue in Diabetes Patients: डायबिटीज मरीजों के लिए कितना खतरनाक है डेंगू? शोधकर्ताओं ने दी स्पेशल केयर और वैक्सीन की सलाह
मानसून के मौसम के साथ ही देश भर में डेंगू (Dengue) के मामलों में तेजी से उछाल देखने को मिलता है। इस मौसम में आम लोगों के साथ-साथ टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 Diabetes) से पीड़ित मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की बेहद जरूरत है।
'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डायबिटीज एंड टेक्नोलॉजी' (International Journal of Diabetes & Technology) में प्रकाशित एक रिव्यू पेपर के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में डेंगू का वायरस न केवल तेजी से फैलता है, बल्कि उनके गंभीर और जानलेवा स्थिति में पहुंचने का जोखिम भी सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक होता है।
डायबिटीज मरीजों के लिए क्यों ज्यादा खतरनाक है डेंगू?
प्रसिद्ध डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. जोथीदेव केसवदेव और जांद्रा हेल्थकेयर के डॉ. राजीव कोविल के अनुसार, हाई ब्लड शुगर के कारण मरीजों का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) पहले से ही कमजोर होता है। ऐसे में जब डेंगू का मच्छर काटता है, तो:
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प्लेटलेट्स का गिरना: शरीर में प्लेटलेट्स काउंट (Platelet Count) अचानक और तेजी से नीचे गिर सकता है।
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इंटरनल ब्लीडिंग: मसूड़ों, नाक या शरीर के अंदरूनी हिस्सों से खून बहने (Internal Bleeding) की संभावना बढ़ जाती है।
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डेंग्यू शॉक सिंड्रोम (Dengue Shock Syndrome): मरीज की स्थिति बिगड़ने पर डेंग्यू शॉक सिंड्रोम का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
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अतिरिक्त जोखिम: केवल डायबिटीज ही नहीं, बल्कि मरीज की बढ़ती उम्र, मोटापा, किडनी रोग, हाई ब्लड प्रेशर और अनियंत्रित ब्लड शुगर (Uncontrolled Glycemic Control) भी स्थिति को गंभीर बना देते हैं।
डायबिटीज मरीजों के लिए डेंगू वैक्सीन क्यों जरूरी?
डॉ. केसवदेव के मुताबिक, भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं और उनमें से अधिकांश का ब्लड शुगर लेवल सही तरह से कंट्रोल में नहीं रहता। ऐसे मरीजों में किसी भी संक्रमण से जटिलताएं पैदा होने का खतरा 2 से 4 गुना अधिक होता है।
शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों का सुझाव है कि डेंगू प्रभावित (Endemic) इलाकों में रहने वाले डायबिटीज मरीजों के नियमित हेल्थकेयर रूटीन में डेंगू वैक्सीन (Dengue Vaccine) को शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि गंभीर संक्रमण और मृत्यु दर के जोखिम को कम किया जा सके।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
1. शुरुआती सामान्य लक्षण:
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तेज बुखार
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जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर में तेज दर्द
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सिरदर्द और आंखों के पीछे दर्द
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उल्टी, जी मिचलाना या त्वचा पर लाल चकत्ते (Rashes)
2. गंभीर/इमरजेंसी लक्षण (तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें):
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पेट में उठने वाला तेज और लगातार दर्द
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लगातार उल्टियां होना
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मसूड़ों या नाक से खून बहना
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अत्यधिक सुस्ती, कमजोरी या चक्कर आना
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पेशाब की मात्रा में अचानक कमी आना
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ब्लड शुगर लेवल में अचानक भारी उतार-चढ़ाव होना
डेंगू से बचाव और प्रबंधन के जरूरी उपाय
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मच्छरों से बचाव: फुल आस्तीन (बांह) के कपड़े पहनें और अच्छी क्वालिटी के मॉस्किटो रिपेलेंट (मच्छर भगाने वाली क्रीम) का इस्तेमाल करें।
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जलभराव रोकें: अपने घर और आसपास गमलों, कूलरों या खुले बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
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ब्लड शुगर मॉनिटरिंग: अपने शुगर लेवल की नियमित जांच करें और उसे नियंत्रित रखने की कोशिश करें।
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प्रचुर मात्रा में पानी पिएं: शरीर को अच्छी तरह हाइड्रेटेड रखें और सात्विक व संतुलित आहार लें।
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दवाइयों में बदलाव: KIMS हॉस्पिटल के डॉ. विजय नेगलुर के अनुसार, डेंगू होने पर मरीज की भूख, डिहाइड्रेशन और सेहत के आधार पर डायबिटीज की दवाओं की खुराक में अस्थायी बदलाव (Adjustments) की जरूरत हो सकती है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें या बंद न करें।