जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज के खिलाफ भड़का युवाओं का गुस्सा: छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग को बताया लोकतंत्र की हत्या
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में छात्रों और युवाओं पर हुए पुलिस बल प्रयोग और लाठीचार्ज की आंच अब पड़ोसी राज्यों तक फैल चुकी है। अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस द्वारा की गई सख्ती के विरोध में हरियाणा के युवाओं और छात्र संगठनों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में युवा सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं का साफ कहना है कि लोकतांत्रिक देश में अपनी आवाज उठाना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन पुलिस द्वारा जिस तरह से छात्रों पर लाठियां भांजी गईं और उन्हें खदेड़ा गया, वह सीधे तौर पर लोकतंत्र का गला घोटने जैसा है। इस बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता का आरोप
युवाओं और छात्र नेताओं का आरोप है कि वे पूरी शांति के साथ अपनी जायज मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर अपनी बात रख रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उनकी सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग करना उचित समझा। इस अमानवीय कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए, जिससे पूरे देश के छात्र वर्ग में रोष व्याप्त हो गया है। हरियाणा में हुए इस विरोध मार्च के दौरान युवाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि युवाओं की आवाज को इस तरह लाठी और डंडों के जोर पर दबाया नहीं जा सकता, और यह कार्रवाई देश के संविधान द्वारा दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का खुला उल्लंघन है।
सरकार विरोधी नारों के साथ देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित छात्रों के पक्ष में उचित कदम नहीं उठाए गए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक उग्र किया जाएगा। युवाओं का यह बढ़ता जनसैलाब आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर अब छात्र संगठन पूरी तरह से एकजुट नजर आ रहे हैं।