Haryana: चरखी दादरी में अनोखी शादी फेरों से पहले कराया HIV टेस्ट, एक-दूसरे को तोहफे में दी कलम

Haryana: चरखी दादरी में अनोखी शादी फेरों से पहले कराया HIV टेस्ट, एक-दूसरे को तोहफे में दी कलम

हरियाणा के चरखी दादरी जिले से एक ऐसी शादी की तस्वीर सामने आई है, जिसने रूढ़िवादी परंपराओं और दिखावे को दरकिनार कर पूरे देश के सामने आधुनिक और प्रगतिशील सोच की एक बेमिसाल नजीर पेश की है। यहां एक नवदंपति ने फिजूलखर्ची और भारी-भरकम बंदोबस्त से दूर रहकर, विवाह बंधन में बंधने से पहले अपने स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी।

इस अनोखे विवाह की चर्चा अब सोशल मीडिया से लेकर देश के हर कोने में समाज सुधार की एक नई लहर के रूप में हो रही है।

बाबा साहेब की तस्वीर के सामने लिया संकल्प, नहीं हुए पारंपरिक फेरे

चरखी दादरी के रहने वाले मनेंद्र दहिया और मोनिका तंवर पेशे से काउंसलर (Counselor) हैं। अपनी पेशेवर समझ और आधुनिक दृष्टिकोण को जीवन में उतारते हुए दोनों ने अपनी शादी को पूरी तरह से सादगीपूर्ण और दहेज मुक्त रखा:

  • स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता: शादी की रस्मों को शुरू करने से पहले दोनों ने स्वेच्छा से अपना एचआईवी (HIV) टेस्ट करवाया। टेस्ट रिपोर्ट सामान्य (नेगेटिव) आने के बाद ही वे आगे बढ़े।

  • संविधान निर्माता के सामने विवाह: इस विवाह में न तो कोई पारंपरिक फेरे हुए और न ही बैंड-बाजे या तड़क-भड़क का प्रदर्शन किया गया। दूल्हा-दुल्हन ने संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के सामने एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।

  • गुलाब नहीं, 'कलम' का तोहफा: स्टेज पर जयमाला या गुलाब के फूलों के आदान-प्रदान की जगह, नवदंपति ने एक-दूसरे को 'कलम' (Pen) भेंट की। इसके जरिए उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि शिक्षा और जागरूकता ही किसी भी समृद्ध परिवार और समाज की असली बुनियाद हैं।

"एचआईवी (HIV) जैसे विषयों पर समाज में खुलकर बात होना जरूरी"

अपनी इस अनूठी पहल पर बात करते हुए दूल्हा मनेंद्र दहिया ने कहा कि शादी केवल एक सामाजिक रस्म या दिखावा नहीं है, बल्कि यह दो लोगों के बीच आपसी विश्वास और भविष्य की जिम्मेदारी का नाम है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि शादी से पहले बिना किसी झिझक के स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी जांचें जरूर करवानी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी और भविष्य पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ रह सके।

वहीं दुल्हन मोनिका तंवर ने समाज की सोच पर चोट करते हुए कहा कि हमारे समाज में आज भी एचआईवी और यौन स्वास्थ्य जैसे जरूरी विषयों पर खुलकर बात करने को वर्जित माना जाता है, जबकि कड़वी हकीकत यह है कि इन बीमारियों से बचने का एकमात्र और सबसे बड़ा हथियार जागरूकता ही है।

समाज को आईना दिखाती यह 'नई सोच की शादी'

इस विवाह समारोह में गवाह बने सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल और दूल्हे के पिता कृष्ण दहिया ने इस कदम को बेहद क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शादियां केवल धन-दौलत और स्टेटस सिंबल के प्रदर्शन का माध्यम बनकर रह गई हैं, जिसके कारण कई परिवार कर्ज के जाल में डूब जाते हैं। ऐसे समय में मनेंद्र और मोनिका की यह पहल समाज को आईना दिखाने का काम करती है।

इस विवाह की सफलता के बाद, परिवार और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने देश के अन्य युवाओं से भी आह्वान किया है कि वे आडंबरों को छोड़कर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी ऐसी ही सादगीपूर्ण शादियों को बढ़ावा दें।

 

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