विभाजन विभीषिका दिवस पर हरियाणा में गरमाई सियासत: बीजेपी ने कसी कमर, मैदान में उतरे 26 तेज-तर्रार प्रवक्ता

विभाजन विभीषिका दिवस पर हरियाणा में गरमाई सियासत: बीजेपी ने कसी कमर, मैदान में उतरे 26 तेज-तर्रार प्रवक्ता

देश के सबसे दर्दनाक और ऐतिहासिक अध्याय यानी 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' को लेकर हरियाणा की राजनीतिक जमीन पर सरगर्मी काफी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस गंभीर और संवेदनशील अवसर को जनता के बीच पूरी शिद्दत से ले जाने के लिए अभी से एक बड़ी और ठोस रणनीति तैयार कर ली है। इसी कड़ी में प्रदेश संगठन ने राज्यभर में कार्यक्रमों के सफल आयोजन, विचारों के प्रचार-प्रसार और विपक्ष के हमलों का माकूल जवाब देने के लिए कुल 26 प्रवक्ताओं की एक भारी-भरकम और मजबूत सूची आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है। पार्टी के इस बड़े संगठनात्मक कदम से स्पष्ट है कि बीजेपी इस ऐतिहासिक दिन के जरिए देश के अतीत और राष्ट्रवाद के मुद्दों को जनता के बीच प्रमुखता से रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।

हरियाणा में बीजेपी की खास तैयारी और प्रवक्ताओं को सौंपी गई अहम जिम्मेदारियां

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व द्वारा जारी की गई इस नई सूची में विभिन्न जिलों और मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अनुभवी और धारदार वक्ताओं को चुना गया है, जिन्हें 'विभाजन विभीषिका दिवस' के मौके पर आयोजित होने वाले संगोष्ठियों, मौन जुलूसों और विचार गोष्ठियों की कमान सौंपी गई है। इन सभी प्रवक्ताओं को यह विशेष जिम्मेदारी दी गई है कि वे देश के विभाजन के दौरान हमारे पूर्वजों द्वारा झेले गए भीषण दर्द, संघर्ष और इतिहास के काले पन्नों की सच्चाई को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों के माध्यम से पार्टी वैचारिक मोर्चे पर अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने की कोशिश कर रही है ताकि राजनीतिक गलियारों में नैरेटिव पूरी तरह सेट किया जा सके।

ऐतिहासिक दिन के बहाने राजनीतिक और वैचारिक धार देने की कवायद

हर साल मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य उन लाखों लोगों के बलिदान और पीड़ा को याद करना है, जिन्हें देश के बंटवारे के वक्त अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था। हरियाणा की राजनीति में इस प्रकार के राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व के दिनों को पार्टी हमेशा से ही एक बड़े जन-सरोकार के रूप में मनाती आई है और 26 प्रवक्ताओं की फौज मैदान में उतारकर बीजेपी ने यह साफ कर दिया है कि वह इस विषय पर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। जैसे-जैसे इस दिवस की तारीख नजदीक आ रही है, राज्य के राजनीतिक माहौल में बयानबाजी और वैचारिक बहसों का दौर भी और अधिक तेज होने की पूरी संभावना है।

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