FIFA World Cup: टिकट बिके हाउसफुल, फिर भी स्टेडियम खाली! टीवी पर दिख रहीं खाली सीटों पर फीफा ने तोड़ी चुप्पी
फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच मैदान पर तो दिखने लगा है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़े विवाद ने भी जन्म ले लिया है। टूर्नामेंट के शुरुआती दिनों में ही स्टेडियम के स्टैंड्स में बड़ी संख्या में खाली सीटें नजर आने के बाद सोशल मीडिया और फुटबॉल जगत में तीखी बहस छिड़ गई है। खासकर मेक्सिको के ग्वाडलाहारा में दक्षिण कोरिया और चेक रिपब्लिक के बीच खेले गए मुकाबले के दौरान टीवी प्रसारण में कई हिस्से पूरी तरह खाली दिखाई दे रहे थे।
इस बात ने फैंस को इसलिए हैरान किया क्योंकि फीफा की तरफ से इस मैच को लगभग हाउसफुल बताया गया था। अब इस पूरे मामले पर दुनिया भर में हो रही थू-थू के बाद फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा (FIFA) को सामने आकर सफाई देनी पड़ी है।
क्या है खाली सीटों और दावों का पूरा गणित?
ग्वाडलाहारा स्टेडियम की कुल क्षमता और आधिकारिक आंकड़ों में बहुत मामूली अंतर था, लेकिन जमीनी हकीकत टीवी पर कुछ और ही बयां कर रही थी। इस स्थिति को आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:
फीफा की सफाई: 'लोग सीटों पर बैठने के बजाय खाना खा रहे थे'
जब सोशल मीडिया पर फीफा के आधिकारिक आंकड़ों को 'फर्जी' और 'फेक' बताया जाने लगा, तो फीफा ने एक बयान जारी कर इसके पीछे का अजीबोगरीब तर्क सामने रखा।
फीफा (FIFA) का आधिकारिक बयान:
"स्टेडियम में दर्शकों की उपस्थिति का आंकड़ा इस बात से तय होता है कि कितने टिकट गेट पर स्कैन हुए हैं और कितने लोग परिसर के भीतर दाखिल हुए हैं, न कि इस बात से कि किसी खास समय पर टीवी कैमरे में कितनी सीटें भरी हुई दिख रही हैं। ग्वाडलाहारा मैच के दौरान बड़ी संख्या में टिकटधारक दर्शक अपनी निर्धारित सीटों पर बैठने के बजाय कॉन्कोर्स (स्टेडियम गैलरी) और फूड-स्टॉल एरिया में खड़े होकर मैच का लुत्फ उठा रहे थे, जिसके चलते सीटें खाली दिख रही थीं।"
निशाने पर फीफा की टिकट नीति: 'डायनेमिक प्राइसिंग' ने बिगाड़ा खेल
भले ही फीफा दर्शकों के कॉन्कोर्स में होने का बहाना बना रहा हो, लेकिन खेल समीक्षकों और फैंस का मानना है कि इस खालीपन की असली वजह टिकटों की आसमान छूती कीमतें हैं। अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में हो रहे इस टूर्नामेंट के लिए फीफा ने 'डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल' (मांग के आधार पर कीमतें बदलना) अपनाया है। टिकटों की बिक्री शुरू होने के बाद से कई बार इनकी कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी की गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ सामान्य मैचों के टिकटों की कीमतें भी बढ़कर पांच अंकों (यानी लाखों रुपये) तक पहुंच चुकी हैं। हालांकि, फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने इन महंगी टिकटों का बचाव करते हुए कहा था कि ये कीमतें उत्तरी अमेरिकी बाजार के स्टैंडर्ड के हिसाब से बिल्कुल सही हैं।
टूर्नामेंट की वर्तमान स्थिति:
वर्ल्ड कप शुरू होने से ठीक पहले फीफा ने खुद स्वीकार किया था कि इस महाकुंभ के केवल 29 मैच ही पूरी तरह से सोल्ड-आउट (सारे टिकट बिक चुके) हो पाए हैं, जबकि 75 मुकाबलों के लिए टिकट अब भी उपलब्ध हैं। ऐसे में महंगे टिकटों की जिद और स्टेडियम में दिखने वाली खाली सीटें आने वाले दिनों में फीफा के इस मेगा इवेंट की साख पर भारी पड़ सकती हैं।