57 साल पहले मुंबई की असली बारिश में शूट हुआ था ये सदाबहार गाना, बिना डांस के भी बन गया बॉलीवुड का 'कल्ट क्लासिक'

57 साल पहले मुंबई की असली बारिश में शूट हुआ था ये सदाबहार गाना, बिना डांस के भी बन गया बॉलीवुड का 'कल्ट क्लासिक'

बारिश का नाम आते ही बॉलीवुड प्रेमियों के जेहन में सबसे पहले अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी का वो मशहूर गाना 'रिमझिम गिरे सावन' तैरने लगता है। साल 1979 में आई फिल्म 'मंजिल' का यह गाना आज भी मानसून का पर्याय बना हुआ है। 57 साल बीत जाने के बाद भी यह गीत अपनी ताजगी नहीं खो पाया है। क्या आप जानते हैं कि इस गाने को शूट करने के लिए फिल्म के मेकर्स ने न केवल असली बारिश का इंतजार किया था, बल्कि बिना किसी कोरियोग्राफी या डांस स्टेप्स के इसे शूट किया गया था, जो उस दौर में किसी चमत्कार से कम नहीं था।

मुंबई की असली बारिश और बासु चटर्जी का 'रिस्क'

फिल्म 'मंजिल' के निर्देशक बासु चटर्जी की सादगी और यथार्थवाद के प्रति उनका जुनून इस गाने में साफ झलकता है। आमतौर पर फिल्मों में बारिश के दृश्य कृत्रिम (Artificial) तरीके से शूट किए जाते हैं, लेकिन 'रिमझिम गिरे सावन' को मुंबई की मरीन ड्राइव पर उस वक्त शूट किया गया जब सचमुच आसमान से बारिश हो रही थी। डायरेक्टर चाहते थे कि यह सीन बिल्कुल नेचुरल लगे, इसलिए उन्होंने बिना किसी तामझाम या डांस सीक्वेंस के अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी को सड़कों पर घूमने और भीगने के लिए कहा। उस समय की शूटिंग का किस्सा साझा करते हुए मौसमी चटर्जी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें पता ही नहीं चला कि शूटिंग कब शुरू हो गई थी। वे लंबे समय तक बारिश में भीगती रहीं और इसी दौरान यह खूबसूरत सीक्वेंस कैमरे में कैद हो गया, जिसमें उनका काजल तक बह गया था, जो इसे और अधिक वास्तविक बनाता है।

किशोर-लता की आवाज और आरडी बर्मन का जादू

इस गाने को सदाबहार बनाने का श्रेय महान संगीतकार आरडी बर्मन और गीतकार योगेश को जाता है। जब किशोर कुमार की मखमली आवाज के साथ लता मंगेशकर की सुरीली धुन मिलती है, तो यह गाना संगीत प्रेमियों के दिलों को छू लेता है। आरडी बर्मन का संगीत और योगेश के बोल इस गाने को न केवल सुनने में सुखद बनाते हैं, बल्कि एक अलग तरह का सुकून भी देते हैं। बिना किसी व्यावसायिक डांस के, केवल बारिश और दो किरदारों के बीच की मस्ती ने इसे भारतीय सिनेमा का सबसे 'रोमांटिक और नेचुरल' बारिश का गीत बना दिया है।

आज भी क्यों है यह लोगों की पहली पसंद

आज के दौर में जब गानों में भारी प्रोडक्शन और ऑटो-ट्यून का इस्तेमाल होता है, 'रिमझिम गिरे सावन' सादगी का जीता-जागता उदाहरण है। यही कारण है कि 5 दशक बाद भी हर मानसून में रेडियो से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक यह गाना ट्रेंडिंग लिस्ट में बना रहता है। यह गाना सिर्फ एक धुन नहीं, बल्कि मुंबई की सड़कों की उस पुरानी यादों का सफर है, जिसे हर पीढ़ी अपना मानती है। यह आज भी साबित करता है कि अगर संगीत और प्रस्तुति में सच्चाई हो, तो उसे किसी दिखावे की जरूरत नहीं पड़ती।

Latest Posts