मां कोमा में थीं और पिता ने भेज दिया था शूट पर... संजय दत्त ने नम आंखों से याद किए नरगिस दत्त के आखिरी दिन

मां कोमा में थीं और पिता ने भेज दिया था शूट पर... संजय दत्त ने नम आंखों से याद किए नरगिस दत्त के आखिरी दिन

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त ने हाल ही में अपनी मां और भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री नरगिस दत्त के जीवन के उन सबसे दर्दनाक और संघर्षपूर्ण दिनों को याद किया है, जब पूरा परिवार एक तरफ कैंसर जैसी भयानक बीमारी से जूझ रहा था और दूसरी तरफ उन्हें फिल्मों की दुनिया में अपनी शुरुआत करनी थी। एक यूट्यूब चैनल पर दिल को छू लेने वाली बातचीत के दौरान संजय दत्त ने बताया कि कैसे उनकी मां अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही थीं, और उस मुश्किल घड़ी में उनके पिता सुनील दत्त ने उन्हें क्या बड़ी सीख दी थी।

पैंक्रियाटिक कैंसर से जंग और अमेरिका में इलाज

नरगिस दत्त के निधन का वह दौर दत्त परिवार के लिए बेहद कठिन और चुनौती भरा था। संजय दत्त ने बातचीत में साझा किया कि उनकी मां को पैंक्रियाटिक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने अपनी आगोश में ले लिया था। 1980 के दशक की शुरुआत में मेडिकल साइंस और टेक्नोलॉजी आज जितनी उन्नत नहीं थी, इसलिए इलाज के लिए उन्हें अमेरिका के न्यू यॉर्क स्थित स्लोअन केटरिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी एक बड़ी सर्जरी हुई। उस समय संजय दत्त महज 19-20 साल के युवा थे और अपनी मां को गंभीर शारीरिक पीड़ा से गुजरते हुए देखना उनके लिए अंदर से झकझोर देने वाला अनुभव था।

जब कोमा में थीं मां और पिता सुनील दत्त ने भेजा शूटिंग पर

संजय दत्त ने अपने जीवन के उस सबसे असहज पल को याद करते हुए बताया कि जब उनकी पहली फिल्म रिलीज होने वाली थी, तब उन पर पेशेवर और मानसिक दोनों तरह का भारी दबाव था। एक तरफ उनकी मां अस्पताल में कोमा में थीं और दूसरी तरफ उनके पिता सुनील दत्त ने उन्हें अपनी फिल्म की शूटिंग पूरी करने के लिए वापस काम पर भेज दिया था। संजय ने कहा कि उस कम उम्र में उन्हें अपने पिता का यह फैसला समझ नहीं आया था कि जब मां वेंटिलेटर या कोमा में हैं, तब कोई फिल्म पूरी करने के लिए कैसे जा सकता है। हालांकि, पिता के आदेश का पालन करते हुए उन्होंने अपनी फिल्म पूरी की और वापस लौटे।

'घर लौटते ही मां ने छोड़ दी थी जंग'

अपनी मां के आखिरी पलों को याद करते हुए संजय दत्त काफी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने नरगिस जी को एक सच्ची योद्धा की तरह अंत तक लड़ते हुए देखा था। उनके भीतर घर लौटने की एक जबरदस्त जिद थी, और जब तक वे मुंबई अपने घर वापस नहीं आ गईं, उन्होंने अपनी बीमारी के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। लेकिन जैसे ही वे अपने घर लौटीं, उन्होंने मानो हार मान ली और दुनिया को अलविदा कह दिया। आपको बता दें कि नरगिस दत्त का मात्र 51 वर्ष की आयु में 3 मई 1981 को निधन हो गया था, और वह अपने बेटे संजय दत्त की पहली फिल्म 'रॉकी' की रिलीज भी नहीं देख पाई थीं।

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