Hema Malini Politics Entry: राजनीति में हेमा मालिनी के कदम रखते ही क्यों डर गए थे धर्मेंद्र? 'ड्रीम गर्ल' ने मथुरा से ही चुनाव लड़ने की शर्त पर किया बड़ा खुलासा
बॉलीवुड की मशहूर 'ड्रीम गर्ल' और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की वरिष्ठ नेता हेमा मालिनी पिछले 12 वर्षों से लगातार उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी मथुरा से सांसद चुनी जाती रही हैं। हाल ही में एक विशेष इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने फिल्मी करियर से लेकर राजनीतिक सफर तक के अनसुने पन्नों को बेबाकी से खोला। हेमा मालिनी ने खुलासा किया कि जब उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखने का फैसला किया था, तब उनके पति और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र इस फैसले के बिल्कुल खिलाफ थे। धर्मेंद्र का खुद राजनीति में जाने का अनुभव बहुत सुखद नहीं रहा था, इसलिए वे नहीं चाहते थे कि हेमा भी इस क्षेत्र में आएं।
धर्मेंद्र को सताती थी हेमा की सुरक्षा की चिंता: रैलियों की भीड़ और उड़ानों से डरते थे 'ही-मैन'
हेमा मालिनी ने बताया कि जब उन्होंने बीजेपी के लिए चुनाव प्रचार करना शुरू किया, तो पार्टी उन्हें देश के अलग-अलग राज्यों और दूर-दराज के इलाकों में भेजा करती थी। इन दौरों के दौरान धर्मेंद्र हर पल उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद डरे और चिंतित रहते थे। धर्मेंद्र अक्सर हेमा से फोन पर पूछते थे कि क्या उन्हें वाकई यकीन है कि चुनावी रैलियों की उस विशाल भीड़ के बीच वे सुरक्षित हैं? सिर्फ जमीनी रैलियां ही नहीं, बल्कि चुनाव प्रचार के दौरान लगातार हेलीकॉप्टर से की जाने वाली यात्राओं को लेकर भी धर्मेंद्र काफी घबराए रहते थे। हालांकि, इन दौरों के दौरान ही हेमा मालिनी को आम जनता के बीच अपनी वास्तविक लोकप्रियता और उनके निश्छल प्रेम का गहरा अहसास भी हुआ।
मां ने लिखा था पहला चुनावी भाषण, विनोद खन्ना बने राजनीति के मार्गदर्शक
राजनीति में प्रवेश का पूरा श्रेय अपनी मां को देते हुए हेमा ने बताया कि शुरुआत में वे राजनीति में आने के बिल्कुल पक्ष में नहीं थीं। लेकिन उनकी मां ने उन्हें समझाया कि अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में बीजेपी एक निष्ठावान और अच्छी पार्टी है। वहीं, बॉलीवुड अभिनेता विनोद खन्ना ने उन्हें राजनीति की राह में आगे बढ़ने का व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। हेमा मालिनी ने अपना पहला राजनीतिक भाषण 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब के गुरदासपुर में विनोद खन्ना के समर्थन में दिया था। उस समय वे काफी घबराई हुई थीं, क्योंकि उन्हें राजनीतिक भाषा में बोलना नहीं आता था, तब उनकी मां ने ही हिंदी में उनका पहला भाषण लिखकर तैयार किया था।
'चुनाव लडूंगी तो केवल मथुरा से ही': कान्हा की भक्ति में रखी थी यह खास शर्त
मथुरा संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली हेमा मालिनी ने 2014, 2019 और हालिया 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार हैट्रिक लगाते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। चुनावी राजनीति में उतरने को लेकर हेमा मालिनी की एक बहुत ही खास शर्त थी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वे अगर चुनाव लड़ेगीं तो केवल और केवल मथुरा सीट से ही लड़ेगीं, क्योंकि वे भगवान श्री कृष्ण की परम भक्त हैं और मथुरा से उनका एक आत्मिक और आध्यात्मिक जुड़ाव है। शुरुआत में मथुरा सीट किसी अन्य उम्मीदवार के लिए आरक्षित रखी जा रही थी, लेकिन हेमा मालिनी की इस शर्त और अटूट श्रद्धा को देखते हुए अंततः पार्टी नेतृत्व ने यह सीट उन्हीं को सौंपी, जिसके बाद से वे लगातार क्षेत्र की सेवा कर रही हैं।