UPSC में AI का पहला महा-एक्शन: इंटरव्यू से ठीक पहले 569 आवेदन किए खारिज, आयोग ने खंगाला 15 साल का पूरा डिजिटल डेटा

UPSC में AI का पहला महा-एक्शन: इंटरव्यू से ठीक पहले 569 आवेदन किए खारिज, आयोग ने खंगाला 15 साल का पूरा डिजिटल डेटा

देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा परीक्षा आयोजित करने वाले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और आधुनिक कदम उठाया है। यूपीएससी ने अपनी चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक डेटा एनालिटिक्स टूल्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस नई एआई तकनीक के पहले ही महा-एक्शन में आयोग ने इंटरव्यू (Personality Test) के मुहाने पर खड़े 569 उम्मीदवारों के आवेदनों को तत्काल प्रभाव से खारिज (Cancel) कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद देश भर के सिविल सेवा अभ्यर्थियों और कोचिंग गलियारों में हड़कंप मच गया है।

पिछले 15 सालों का पूरा डेटा खंगालकर एआई ने पकड़ी गड़बड़ी

यूपीएससी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इस बार आयोग ने उम्मीदवारों द्वारा दी गई जानकारियों को क्रॉस-चेक करने के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय एडवांस्ड एआई सॉफ्टवेयर का सहारा लिया। इस अत्याधुनिक सिस्टम ने पिछले 15 वर्षों के ऐतिहासिक डेटाबेस को खंगाला और उम्मीदवारों के नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और क्रीमी लेयर से जुड़े दस्तावेजों का बारीकी से मिलान किया। जांच में पाया गया कि इन 569 अभ्यर्थियों ने या तो अपनी पहचान छुपाई थी, प्रयासों (Attempts) की संख्या को लेकर गलत जानकारी दी थी या फिर आरक्षण के नियमों का लाभ लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था।

इंटरव्यू के दरवाजे पर पहुंचने के बाद भी नहीं बच पाए फर्जी उम्मीदवार

आयोग की यह कार्रवाई इसलिए भी बेहद चौंकाने वाली है क्योंकि ये सभी 569 उम्मीदवार प्रीलिम्स और मेन्स जैसी कठिन परीक्षाओं को पास कर इंटरव्यू के बेहद करीब पहुंच चुके थे। पुराने सिस्टम में कई बार ऐसी गड़बड़ियां अंतिम चयन के बाद या ट्रेनिंग के दौरान सामने आती थीं, लेकिन इस बार एआई तकनीक ने इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इन संदिग्ध प्रोफाइल को फिल्टर कर बाहर का रास्ता दिखा दिया। यूपीएससी ने साफ किया है कि योग्यता और ईमानदारी से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी इस एआई ट्रैकिंग सिस्टम को और ज्यादा कड़ा किया जाएगा।

दिल्ली के करोल बाग-मुखर्जी नगर से लेकर राज्यों के स्थानीय सेंटर्स तक भारी खलबली

भौगोलिक और स्थानीय कोचिंग हब (Geographical Educational Hubs) जैसे दिल्ली के मुखर्जी नगर, करोल बाग, राजेंद्र नगर के साथ-साथ प्रयागराज, पटना और जयपुर जैसे प्रमुख शहरों में इस खबर के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय स्तर पर सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच इस नए एआई फिल्टर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और चिंताएं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आयोग के इस कड़े रुख से उन ईमानदार और दिन-रात मेहनत करने वाले जमीनी छात्रों को बहुत बड़ा फायदा मिलेगा, जो अक्सर फर्जीवाड़ा करने वाले तत्वों के कारण मेरिट लिस्ट से बाहर हो जाते थे।

जेनेरेटिव एआई और आधुनिक सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है यूपीएससी का यह फैसला

आज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल सर्च इंजन के युग में देश भर के छात्र यूपीएससी के इस नए एआई स्क्रूटनी नियम और रिजेक्शन लिस्ट को लगातार सर्च कर रहे हैं। इंटरनेट पर लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि एआई किस तरह से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को बदल रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपीएससी का यह आधुनिक प्रयोग देश की अन्य बड़ी भर्ती परीक्षाओं (जैसे SSC, State PSCs) के लिए भी एक नजीर बनेगा और आने वाले दिनों में सरकारी परीक्षाओं से भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का पूरी तरह से खात्मा करने में मददगार साबित होगा।

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