CBSE vs UP Board : 12वीं के रिजल्ट में नंबरों की सुनामी, सीबीएसई में 95% वाले छात्र यूपी बोर्ड से 634 गुना अधिक
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणामों का एक तुलनात्मक और विस्तृत विश्लेषण सामने आया है, जो देश की दो सबसे बड़ी परीक्षा प्रणालियों के बीच मार्किंग पैटर्न (अंक देने की पद्धति) के एक बहुत बड़े अंतर को उजागर करता है। इस विश्लेषण के मुताबिक, यूपी बोर्ड की तुलना में सीबीएसई की इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में 95 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले मेधावी छात्रों की संख्या 634 गुना से भी अधिक है।
गौरतलब है कि सीबीएसई ने 13 मई को और यूपी बोर्ड ने 23 अप्रैल को अपने-अपने 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित किए थे। दोनों बोर्डों के नतीजों के सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical Analysis) ने अब छात्रों और शिक्षाविदों के बीच इस बात की नई बहस छेड़ दी है कि क्या सीबीएसई बोर्ड यूपी बोर्ड की तुलना में कहीं अधिक स्कोरिंग है।
कुल परीक्षार्थी और पास प्रतिशत का गणित
दोनों बोर्ड की परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों और उनके सफलता प्रतिशत में भी बड़ा अंतर देखने को मिला है:
यूपी बोर्ड (इंटरमीडिएट): इस साल यूपी बोर्ड की 12वीं परीक्षा के लिए कुल 25,75,460 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 24,86,072 छात्र परीक्षा में सम्मिलित हुए। अंतिम परिणामों में कुल 19,98,317 छात्र सफल रहे, जिससे यूपी बोर्ड का कुल पास प्रतिशत 80.38% रहा।
सीबीएसई बोर्ड (क्लास 12): वहीं दूसरी ओर, सीबीएसई की इंटरमीडिएट परीक्षा में देश और विदेश को मिलाकर कुल 17,80,365 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, जिनमें से 17,68,968 परीक्षा में बैठे। इनमें से कुल 15,07,109 छात्र उत्तीर्ण घोषित किए गए, जिससे सीबीएसई का कुल पास प्रतिशत 85.20% दर्ज किया गया।
95% और 90% वाले 'जादुई आंकड़े' का चौंकाने वाला अंतर
दोनों बोर्ड के परीक्षा परिणामों का जब गहराई से विश्लेषण किया गया, तो मेधावियों की संख्या को लेकर बेहद रोचक और हैरान करने वाले तथ्य सामने आए:
95% या अधिक अंक: सीबीएसई बोर्ड में इस साल 95 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले असाधारण मेधावियों की कुल संख्या 17,113 है। इसके विपरीत, यूपी बोर्ड के विशाल छात्र आधार में से महज 27 छात्र-छात्राएं ही ऐसे रहे, जो 95 फीसदी या उससे अधिक का 'जादुई आंकड़ा' पार करने में सफल हो सके। इसी आंकड़े के आधार पर सीबीएसई, यूपी बोर्ड से 634 गुना आगे है।
90% या अधिक अंक: अगर 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक पाने वाले होनहारों की बात करें, तो यूपी बोर्ड के कुल 831 विद्यार्थियों को यह सफलता मिली है। वहीं, सीबीएसई बोर्ड में 90 फीसदी या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले छात्रों की संख्या 94,028 रही है, जो यूपी बोर्ड के मुकाबले कई गुना ज्यादा है।
सीबीएसई के विषयवार 'शतकवीर': अंग्रेजी में बरसे सबसे ज्यादा नंबर
सीबीएसई बोर्ड के मार्किंग पैटर्न की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इस बार विभिन्न विषयों में छात्रों ने शत-प्रतिशत (100 में से 100) अंक बटोरे हैं। विषयवार पूरे 100 अंक हासिल करने वाले 'शतकवीरों' का आंकड़ा इस प्रकार है:
| विषय (Subjects) | 100 में से 100 अंक पाने वाले छात्रों की संख्या |
|---|---|
| अंग्रेजी (English) | 2,401 मेधावी |
| जीव विज्ञान (Biology) | 1,343 मेधावी |
| गणित (Mathematics) | 1,283 मेधावी |
| भौतिक विज्ञान (Physics) | 1,061 मेधावी |
| नागरिक शास्त्र (Civics) | 725 मेधावी |
| अर्थशास्त्र (Economics) | 435 मेधावी |
| इतिहास (History) | 409 मेधावी |
भूगोल और अन्य कला व वाणिज्य वर्ग के विषयों में भी छात्रों के पूरे अंक आने का सिलसिला जारी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीएसई की इस उदार अंक प्रणाली (Liberal Marking System) के कारण उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की कट-ऑफ लिस्ट में सीबीएसई के छात्रों को बड़ा फायदा मिल सकता है, जबकि सख्त मूल्यांकन प्रणाली के चलते यूपी बोर्ड के मेधावी छात्र राष्ट्रीय स्तर की मेरिट में पीछे रह जाते हैं।