बाप निकला हैवान! रिश्तों की सभी हदें पार कर नाबालिग बेटी के साथ की दरिंदगी, फिर डिलीवरी करवाकर डेढ़ लाख में बेचा मासूम बच्चा
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक ऐसी खौफनाक और इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे और कलेजा कांप उठेगा। समाज में पिता और बेटी का रिश्ता सबसे पवित्र और भरोसेमंद माना जाता है, लेकिन रायपुर के इस मामले ने इस रिश्ते को हमेशा के लिए कलंकित कर दिया है। एक कलयुगी पिता ने अपनी ही नाबालिग बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाया और उसके साथ महीनों तकवानियत की हदें पार करता रहा। हद तो तब हो गई जब इस काले कारनामों के चलते जब पीड़िता गर्भवती हो गई, तो उस हैवान पिता ने मामले को छिपाने के लिए अस्पताल में उसकी डिलीवरी करवाई और पैदा होते ही मासूम बच्चे को डेढ़ लाख रुपये में बेच डाला। इस वीभत्स मामले का खुलासा होने के बाद से ही राजधानी रायपुर समेत पूरे राज्य में सनसनी फैल गई है और आम जनता के बीच भारी आक्रोश का माहौल है। आइए इस विस्तृत और सनसनीखेज रिपोर्ट में जानते हैं कि इस काले सच की परतें कैसे खुलीं और पुलिस ने इस हैवान पिता के खिलाफ क्या-क्या कड़े एक्शन लिए हैं।
रिश्तों का कत्ल: कैसे शुरू हुई इस जुल्म की दास्तान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दिल दहला देने वाला मामला रायपुर जिले के एक स्थानीय इलाके का है, जहां एक नाबालिग लड़की अपने परिवार के साथ रहती थी। घर में मां की गैरमौजूदगी या आपसी पारिवारिक परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए उस दरिंदे पिता ने अपनी ही खून की प्यास बुझाने के लिए बेटी को अपनी हवस का निशाना बनाना शुरू कर दिया। जब उस मासूम बच्ची ने इस घिनौने कृत्य का विरोध करने की कोशिश की, तो उसे जान से मारने की धमकियां दी गईं और लगातार मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का शिकार बनाया गया। एक तरफ जहां पिता को अपनी संतान की रक्षा करनी चाहिए थी, वहीं वह खुद उसके जीवन को नर्क बनाने पर तुला हुआ था। लोक-लाज और डर के साये में जी रही वह नाबालिग बेटी अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी, लेकिन उस वहशी दरिंदे के सिर पर हवस का ऐसा भूत सवार था कि उसे किसी भी बात का डर नहीं था।
गर्भवती होने पर रची गई खौफनाक साजिश और डिलीवरी
इस लगातार हो रहे शारीरिक शोषण का नतीजा यह निकला कि कुछ महीनों बाद वह नाबालिग लड़की गर्भवती हो गई। जब इस बात का पता उस कलयुगी पिता को चला, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उसे डर था कि अगर यह बात बाहर आई तो उसकी पोल खुल जाएगी। इस सच को छुपाने के लिए उसने एक बहुत बड़ी और शातिर साजिश रची। उसने अपनी ही बेटी को किसी को भनक लगने दिए बिना अपने संरक्षण में रखा और जब प्रसव का समय नजदीक आया, तो सुनियोजित तरीके से उसे एक स्थानीय अस्पताल या ठिकाने पर ले जाकर उसकी डिलीवरी करवाई। एक नाबालिग बच्ची के साथ इस तरह का कृत्य और फिर उसका प्रसव कराना इस बात की गवाही देता है कि वह अपराधी किस हद तक गिर चुका था।
डेढ़ लाख रुपये में सौदा: मासूम बच्चे को बाजार में बेचा
दरिंदगी की पराकाष्ठा यहीं खत्म नहीं हुई। जब नाबालिग ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, तो उस कलयुगी पिता ने अपनी ही औलाद का सौदा करने की ठान ली। उसने पैसों के लालच में और अपने जुर्म को हमेशा के लिए छुपाने के वास्ते उस नवजात शिशु को बिचौलियों के माध्यम से करीब डेढ़ लाख रुपये में एक अन्य व्यक्ति को बेच डाला। पिता और इंसानियत के नाम पर एक बड़ा कलंक बन चुके इस शख्स ने चंद रुपयों के खातिर अपनी ही खून की एक नन्हीं सी जान को बाजार में बेच दिया। जब इस पूरे घटनाक्रम की भनक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, बाल कल्याण समितियों या पुलिस के गुप्त सूचना तंत्र तक पहुंची, तो प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी गई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और आरोपी पिता की गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) समेत गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस हैवान पिता को धर दबोचा और सलाखों के पीछे भेज दिया। इसके साथ ही पुलिस उन अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है जो इस अवैध बच्चा बेचने के रैकेट (Human Trafficking / Child Selling Syndicate) में शामिल थे और जिन्होंने उस डेढ़ लाख रुपये के सौदे में मध्यस्थता की थी। पुलिस ने नवजात शिशु को सकुशल बरामद करने के लिए भी कई टीमें गठित कर दी हैं ताकि बच्चे को सुरक्षित उसकी माँ या बाल संरक्षण गृह को सौंपा जा सके। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में एक ही चर्चा है कि आखिर कोई पिता इतना क्रूर और पत्थरदिल कैसे हो सकता है।
समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी और नैतिक पतन
रायपुर की यह घटना न केवल एक आपराधिक मामला है, बल्कि यह हमारे आधुनिक समाज के नैतिक पतन और मानवीय संवेदनाओं के खात्मे का एक जीता-जागता उदाहरण है। जिस घर को बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित किला माना जाता है, जब वही किला रक्षक के बजाय भक्षक बन जाए, तो मासूमों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगना लाजमी है। बाल अधिकार संगठनों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि ऐसे दरिंदों को कानून के जरिए इतनी कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए कि समाज में फिर कभी कोई इस तरह की घिनौनी हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके। पीड़िता को इस समय भारी मानसिक आघात और शारीरिक कमजोरी से गुजरना पड़ रहा है, जिसके लिए उसे उचित चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counseling) दिया जा रहा है ताकि वह इस खौफनाक दौर से उबर सके।