एम्स रायपुर के डॉक्टरों का सबसे बड़ा चमत्कार! सिर्फ 90 मिनट में पकड़ी वह जानलेवा दुर्लभ बीमारी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से चिकित्सा जगत की एक बेहद हैरान, गौरवान्वित और बड़ी खबर सामने आ रही है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Raipur) के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम ने अपनी असाधारण प्रतिभा और तत्परता का परिचय देते हुए एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसकी चर्चा अब देश भर के मेडिकल सर्कल्स में हो रही है। मौत और जिंदगी के बीच झूल रहे एक मरीज को जब बेहद नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया, तो एम्स के डॉक्टरों ने बिना एक पल गंवाए महज 90 मिनट (डेढ़ घंटे) के भीतर उसकी एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा बीमारी की सटीक पहचान (Diagnosis) कर ली। बीमारी का पता चलते ही डॉक्टरों ने तुरंत आपातकालीन ऑपरेशन थियेटर तैयार किया और एक बेहद जटिल व खतरनाक सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर मरीज को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च करने और हफ्तों भटकने के बाद भी जिस बीमारी को पकड़ना नामुमकिन साबित हो रहा था, उसे रायपुर एम्स के डॉक्टरों ने पल भर में सुलझाकर यह साबित कर दिया है कि हमारा सरकारी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी अंतरराष्ट्रीय अस्पताल से कम नहीं है। आइए एक मेडिकल रिपोर्टर की नजर से जानते हैं इस सफल ऑपरेशन और डॉक्टरों के इस जादुई कमाल की पूरी इनसाइड स्टोरी।
निजी अस्पतालों से थक-हारकर एम्स पहुंचा था मरीज, डॉक्टरों के सामने थी समय की बड़ी चुनौती
अस्पताल सूत्रों से मिली पक्की जानकारी के मुताबिक, मरीज पिछले काफी समय से असहनीय दर्द और बेहद गंभीर शारीरिक समस्याओं से जूझ रहा था। परिजनों ने उसे कई बड़े निजी हॉस्पिटल्स और क्लीनिकों में दिखाया, जहां दर्जनों टेस्ट कराने के बावजूद भी डॉक्टर उसकी बीमारी के असली कारण का पता लगाने में पूरी तरह नाकाम रहे। लगातार बिगड़ती हालत के बीच मरीज को गंभीर स्थिति में रायपुर एम्स के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। उस समय मरीज की पल्स और बीपी लगातार गिर रहे थे और डॉक्टरों के पास सोचने या समय बर्बाद करने का बिल्कुल भी मौका नहीं था। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने तुरंत सीनियर सर्जन्स और डायग्नोस्टिक टीम को अलर्ट किया और एक के बाद एक कई एडवांस्ड टेस्ट करने के निर्देश दिए।
सिर्फ 90 मिनट का वो चक्रव्यूह, जिसमें डॉक्टरों ने ढूंढ निकाला बीमारी का असली कारण
मरीज को भर्ती करने के ठीक 90 मिनट के भीतर एम्स के अनुभवी डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और अत्याधुनिक मशीनों के तालमेल से उस दुर्लभ मेडिकल कंडीशन को ढूंढ निकाला जो मरीज के शरीर के भीतर धीरे-धीरे उसे मौत की ओर धकेल रही थी। डॉक्टरों ने बताया कि यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि लाखों मरीजों में से किसी एक को होती है, और समय पर इसकी पहचान न होने के कारण 95 फीसदी मामलों में मरीज की जान चली जाती है। यदि पहचान करने में थोड़ी सी भी और देरी हो जाती, तो मरीज के शरीर के मुख्य अंग (Organs) पूरी तरह काम करना बंद कर देते। डॉक्टरों की इस क्विक डायग्नोसिस ने इस पूरे केस का पासा पलट दिया और इलाज की दिशा तय कर दी।
कई घंटों तक चला बेहद जटिल ऑपरेशन, सर्जन्स ने जान की बाजी लगाकर बचाई जान
बीमारी की पुष्टि होते ही एम्स के सीनियर सर्जन्स, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों और पैरामेडिकल स्टाफ की एक बड़ी टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। मरीज को सीधे ऑपरेशन थियेटर (OT) में शिफ्ट किया गया और बेहद जोखिम भरी सर्जरी शुरू की गई। डॉक्टरों के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान हर एक सेकंड कीमती था क्योंकि मरीज का शरीर बेहद कमजोर हो चुका था। कई घंटों तक चले इस मैराथन और बेहद संवेदनशील ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने उस अंदरूनी खराबी को पूरी तरह ठीक कर दिया। ऑपरेशन थियेटर से बाहर आकर जब डॉक्टरों ने सफल सर्जरी की घोषणा की, तो बाहर इंतजार कर रहे परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
मरीज की सेहत में तेजी से हो रहा है सुधार, रायपुर एम्स के डॉक्टरों की देश भर में हो रही तारीफ
सफल सर्जरी के बाद मरीज को फिलहाल डॉक्टरों की कड़ा निगरानी में आईसीयू (ICU) में रखा गया है, जहां उसकी सेहत में काफी तेजी से और सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है। वह अब पूरी तरह खतरे से बाहर है और होश में आकर बातचीत भी कर रहा है। इस ऐतिहासिक और चमत्कारी सफलता के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और देश के अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों ने भी रायपुर एम्स की इस टीम की पीठ थपथपाई है। आम जनता में भी इस खबर के बाद एम्स के प्रति भरोसा और ज्यादा मजबूत हुआ है कि कैसे हमारे डॉक्टर दिन-रात एक करके, सीमित संसाधनों के बावजूद देश के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दान दे रहे हैं।