महतारी वंदन योजना पर सियासत गरमाई: पूर्व विधायक शैलेश पाण्डेय ने सरकार को घेरा, कहा- 'बुजुर्गों का निवाला छीन रही सरकार
छत्तीसगढ़ की 'महतारी वंदन योजना' को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। हाल ही में पूर्व विधायक शैलेश पाण्डेय ने इस योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पाण्डेय ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस योजना के नाम पर प्रदेश की बुजुर्ग महिलाओं के साथ छलावा किया जा रहा है और पात्रता के कठिन नियमों के चलते उनका निवाला छीना जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां ऐसी हैं कि जरूरतमंद महिलाएं योजना के लाभ से वंचित हो रही हैं, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश है।
पात्र महिलाएं हो रही योजना से बाहर
पूर्व विधायक ने दावा किया कि जमीनी स्तर पर स्थितियां कागजी दावों से बिल्कुल उलट हैं। कई ऐसी महिलाएं जो योजना की शर्तों को पूरा करती हैं, उन्हें तकनीकी खामियों या अस्पष्ट नियमों के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पाण्डेय का कहना है कि सरकार को प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत जटिल प्रक्रियाओं ने गरीब और बुजुर्ग महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना का उद्देश्य माताओं और बहनों को आर्थिक संबल प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान में यह केवल एक राजनीतिक स्टंट बनकर रह गई है।
सरकार से तुरंत सुधार की मांग
शैलेश पाण्डेय ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि जल्द ही पात्रता नियमों में ढील नहीं दी गई और योजना को पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने मांग की कि सरकार उन सभी महिलाओं की सूची सार्वजनिक करे जो योजना से बाहर की गई हैं और इसके कारणों का स्पष्टीकरण दे। विपक्ष की इस आक्रामक रणनीति के बाद अब सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है। स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय है कि क्या वास्तव में योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है या यह केवल प्रशासनिक दांव-पेच में उलझकर रह गई है।