'महाभारत नहीं करती, कथा सुनाती हूं...' जब इंदिरा गांधी के सामने बेबाक बोलीं तीजनबाई, जानें पंडवानी के लिए टूटी शादी का सच

'महाभारत नहीं करती, कथा सुनाती हूं...' जब इंदिरा गांधी के सामने बेबाक बोलीं तीजनबाई, जानें पंडवानी के लिए टूटी शादी का सच

छत्तीसगढ़ की माटी से निकलकर वैश्विक मंच पर देश का मान बढ़ाने वाली पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजनबाई (Teejan Bai) के जीवन से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और अनसुना किस्सा इन दिनों कला और राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा बटोर रहा है। यह वाकया उस समय का है जब देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) तीजनबाई की कला से इस कदर प्रभावित हुई थीं कि उन्होंने इस महान कलाकार को दिल्ली आमंत्रित किया था। मुलाकात के दौरान जब इंदिरा गांधी ने मजाकिया लहजे में उनके तीखे तेवरों को लेकर बात की, तो तीजनबाई ने बिना झिझके बेहद संजीदगी और गर्व से यह जवाब दिया था जिसने पूर्व पीएम का दिल जीत लिया था।

कला की राह में अपनों ने मोड़ा मुंह, समाज के विरोध के कारण टूट गई थी पहली शादी

भिलाई के एक छोटे से गांव गनियारी से ताल्लुक रखने वाली तीजनबाई का अंतरराष्ट्रीय कलाकार बनने का सफर कांटों भरा रहा है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग और रायपुर अंचल में उस दौर में महिलाओं का मंच पर आकर तंबूरा हाथ में लेकर खड़े होकर 'कापालिक शैली' में पंडवानी गाना रूढ़िवादी समाज को कतई मंजूर नहीं था। जब उन्होंने महज 13 साल की उम्र में मंच पर महाभारत की कथा सुनाना शुरू किया, तो पारध समाज ने उन्हें जाति से बाहर कर दिया था। हद तो तब हो गई जब उनके इस फैसले के कारण उनकी पहली शादी भी टूट गई, लेकिन उन्होंने कला और भगवान कृष्ण की भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा।

इंदिरा गांधी की पारखी नजर ने बदला भाग्य, छत्तीसगढ़ की लोक कला को दिलाई वैश्विक पहचान

तीजनबाई के हुनर को सबसे पहले देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहचाना। दिल्ली के एक सांस्कृतिक उत्सव में तीजनबाई की कड़क आवाज और अभिनय कला को देखकर इंदिरा गांधी मंत्रमुग्ध हो गई थीं। इसके बाद इंदिरा गांधी के व्यक्तिगत सहयोग और प्रोत्साहन से तीजनबाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। उन्होंने पेरिस, लंदन, अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में छत्तीसगढ़ी बोली में महाभारत के प्रसंगों (जैसे कीचक वध, द्रौपदी चीरहरण) को जीवंत कर विदेशी दर्शकों को भी झूमने पर मजबूर कर दिया। आज तीजनबाई देश के लाखों उभरते कलाकारों के लिए एक महान प्रेरणास्रोत हैं।

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