रायपुर में गूंजा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संदेश! बोले- 'आचार्य पद केवल उपाधि नहीं, बल्कि तप, त्याग और साधना की सर्वोच्च पहचान
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर (Raipur Chhattisgarh) से इस वक्त एक बेहद गरिमामयी और बड़ी खबर सामने आ रही है। संसदीय परंपराओं के संरक्षक और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) एक विशेष धार्मिक व आध्यात्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रायपुर पहुंचे हैं। जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के दीक्षा कल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित विशेष समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने देश और समाज के नाम एक बहुत बड़ा और प्रेरक संदेश दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति में संतों और आचार्यों के स्थान को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि आचार्य का पद केवल एक उपाधि या पदवी नहीं है, बल्कि यह घोर तपस्या, पूर्ण त्याग और अटूट आत्म-साधना की सबसे ऊंची पहचान है।
रायपुर की पावन धरा पर आध्यात्मिक समागम, ओम बिरला ने आचार्य महाश्रमण के चरणों में टेका मत्था
रायपुर में आयोजित इस भव्य और ऐतिहासिक आध्यात्मिक समागम में देश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और जैन समाज के प्रबुद्ध लोग जुटे हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सबसे पहले पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के दर्शन किए और उनके चरणों में पूरी श्रद्धा के साथ मत्था टेककर देश की समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मांगा। ओम बिरला ने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह पावन धरा हमेशा से संतों के आगमन से धन्य होती रही है और आज आचार्य प्रवर के दीक्षा कल्याणक महोत्सव के इस पावन मौके पर उपस्थित होना उनके स्वयं के लिए परम सौभाग्य की बात है। संतों का जीवन ही समाज के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शन होता है।
अहिंसा और नशामुक्ति के संकल्पों की सराहना, बताया राष्ट्र निर्माण का मुख्य आधार
अपने ओजस्वी भाषण के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आचार्य महाश्रमण जी द्वारा समाज कल्याण के लिए चलाई जा रही 'सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति' की देशव्यापी अंहिसा यात्रा और उनके मानवीय संकल्पों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के इस आधुनिक और भौतिकवादी युग में जब समाज में वैचारिक मतभेद बढ़ रहे हैं, तब संतों द्वारा दिखाए गए अहिंसा और सदाचार के मार्ग पर चलकर ही देश को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। ओम बिरला ने जोर देकर कहा कि संतों के उपदेश केवल धार्मिक सीमाओं तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनके द्वारा दिए गए नैतिक संस्कार ही एक मजबूत और चरित्रवान राष्ट्र के निर्माण का मुख्य आधार बनते हैं।
छत्तीसगढ़ के राजनेताओं और गणमान्य नागरिकों की रही गरिमामयी मौजूदगी, रायपुर बना अध्यात्म का केंद्र
इस हाई-प्रोफाइल आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम के दौरान रायपुर के आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ शासन के कई वरिष्ठ मंत्री, स्थानीय विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। लोकसभा अध्यक्ष के इस दौरे और उनके इस प्रभावी संदेश के बाद पूरा रायपुर शहर अध्यात्म और सकारात्मक ऊर्जा के केंद्र में तब्दील हो गया है। आयोजन समिति ने लोकसभा अध्यक्ष का पारंपरिक रूप से शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर भव्य स्वागत किया। इस ऐतिहासिक महोत्सव की गूंज और ओम बिरला का यह बड़ा संदेश अब सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ जमकर चर्चा का विषय बना हुआ है।