सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी: सरेंडर नक्सलियों के खुलासे से हड़कंप, 116 ग्राम सोना, भारी कैश और हथियार बरामद
नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी है। हाल ही में मुख्यधारा में शामिल होकर सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने पूछताछ के दौरान एक के बाद एक कई चौंकाने वाले राज उगले हैं। इनपुट के आधार पर की गई छापेमारी में सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में अवैध कैश, 116 ग्राम सोना और अत्याधुनिक हथियार बरामद किए हैं। यह बरामदगी नक्सलियों की उस छिपी हुई 'काली कमाई' का पर्दाफाश करती है, जिसे वे लेवी और जबरन वसूली के जरिए जुटाते थे।
सरेंडर नक्सलियों ने खोली माओवादियों की पोल
सुरक्षा एजेंसियों के सामने सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने अपनी गतिविधियों के बारे में जो जानकारी दी है, उसने सुरक्षा बलों को हैरान कर दिया है। नक्सलियों ने बताया कि वे कैसे क्षेत्र के ठेकेदारों, व्यापारियों और विकास कार्यों से मिलने वाली राशि को जमा कर गुप्त ठिकानों पर रखते थे। इन सरेंडर करने वाले नक्सलियों के खुलासे के बाद खुफिया एजेंसियों ने उन ठिकानों को चिन्हित किया, जहां से यह भारी खजाना बरामद हुआ है। हथियारों का जखीरा मिलना यह साबित करता है कि माओवादी अभी भी हिंसा के रास्ते पर चलने के लिए भारी मात्रा में संसाधन जुटा रहे थे।
क्या बरामद हुआ इस छापेमारी में?
छापेमारी के दौरान सुरक्षा बलों को जो कुछ मिला, उसने माओवादियों के आर्थिक तंत्र की कमर तोड़ दी है। इस ऑपरेशन में 116 ग्राम सोना, लाखों रुपये नकद और कई घातक हथियार बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई न केवल सुरक्षा बलों की सतर्कता का परिणाम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब नक्सली अपनी ही बिछाई बिसात में फंसते जा रहे हैं। बरामद सोना और कैश सीधे तौर पर उन गरीब ग्रामीणों के शोषण से जुड़े हैं, जिन्हें डरा-धमकाकर नक्सली लेवी वसूलते थे।
नक्सलवाद की कमर पर तगड़ा प्रहार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बरामदगी से माओवादियों की साख और उनका आर्थिक ढांचा दोनों बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। सरेंडर कर चुके नक्सलियों के सहयोग से सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है और उन्हें अब भी कई ऐसे ठिकानों का पता चल रहा है, जहां भारी मात्रा में गोला-बारूद और फंड छिपाया गया है। यह कामयाबी सरकार के उस अभियान को और मजबूती देती है, जिसका लक्ष्य नक्सल प्रभावित इलाकों को पूरी तरह से हिंसा मुक्त बनाना है। आने वाले समय में ऐसे और भी बड़े ऑपरेशंस की संभावना है, जो नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में निर्णायक साबित होंगे।