राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र' कहे जाने वाले बैगा समाज की बड़ी और ऐतिहासिक पहल! शादियों में डीजे और शराब पर लगाया कड़ा प्रतिबंध

राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र' कहे जाने वाले बैगा समाज की बड़ी और ऐतिहासिक पहल! शादियों में डीजे और शराब पर लगाया कड़ा प्रतिबंध

छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचल से समाज सुधार की एक बेहद प्रेरणादायक और अनूठी खबर सामने आ रही है। भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा 'विशेष पिछड़ी जनजाति' (PVTG) के रूप में गोद लिए गए और 'राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र' के नाम से पहचाने जाने वाले बैगा समाज (Baiga Samaj) ने एक बहुत बड़ा और साहसिक फैसला लिया है। समाज ने अपनी प्राचीन संस्कृति, परंपराओं और आर्थिक स्थिति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शादियों और अन्य आयोजनों में डीजे (DJ) के शोर-शराबे और शराब के सेवन पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से न केवल स्थानीय प्रशासनिक हलकों में बल्कि पूरे राज्य में बैगा समाज की इस अनुकरणीय पहल की सराहना की जा रही है।

फिजूलखर्ची और आधुनिक कुरीतियों पर लगाम कसने का फैसला

पारंपरिक रूप से प्रकृति प्रेमी और अपनी समृद्ध संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाले बैगा समाज के बुजुर्गों और युवाओं ने मिलकर यह महसूस किया कि पिछले कुछ वर्षों में आधुनिकता की अंधी दौड़ के चलते शादियों में होने वाला बेहिसाब खर्च गरीब परिवारों की कमर तोड़ रहा है। विवाह समारोहों में भारी-भरकम रकम खर्च करके डीजे बजाने और शराब परोसने की संस्कृति तेजी से पैर पसार रही थी, जिससे कई परिवार कर्ज के जाल में फंसते जा रहे थे। इसी गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए समाज की पंचायत ने एकूमत होकर यह कड़ा निर्णय लिया है कि अब किसी भी वैवाहिक कार्यक्रम में इन दोनों चीजों का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित रहेगा।

नियम तोड़ने वालों पर लगेगा कड़ा सामाजिक दंड

बैगा समाज की हुई इस महापंचायत में सर्वसम्मति से यह भी तय किया गया है कि यदि समाज का कोई भी व्यक्ति इस नियम की अवहेलना करता पाया गया, तो उस पर कड़ा सामाजिक दंड (Social Penalty) लगाया जाएगा। पंचायत के इस कड़े रुख से साफ है कि समाज अपनी खोई हुई सादगी और पारिवारिक ताने-बाने को बचाने के लिए बेहद गंभीर है। बुजुर्गों का मानना है कि डीजे के कर्कश शोर से जहां एक तरफ पर्यावरण और बुजुर्गों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है, वहीं शराब के कारण आपसी विवाद और आर्थिक तंगी बढ़ती है। इस प्रतिबंध के लागू होने से अब शादियां फिर से शांत, सांस्कृतिक और पारंपरिक तरीके से संपन्न हो सकेंगी।

जनजातीय अंचल में सुधर रही है सामाजिक और आर्थिक स्थिति

छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में फैले बैगा समाज के इस कदम को एक बड़े सामाजिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। अन्य आदिवासी समुदायों के लिए भी यह पहल एक प्रेरणा बन रही है कि कैसे वे अपनी परंपराओं को आधुनिक कुरीतियों से बचा सकते हैं। स्थानीय प्रशासनिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे न केवल शादियों में होने वाली अनैतिक गतिविधियों पर रोक लगेगी, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और सादगी से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।

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