भारतीय शेयर बाजार पर क्यों नहीं है गोल्डमैन सैक्स को पूरा भरोसा? दक्षिण कोरिया और ताइवान के आगे रहने की असली वजह आई सामने
दुनियाभर के निवेशकों की नजरें इस समय वैश्विक शेयर बाजारों पर टिकी हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में निवेश के लिहाज से सबसे बेहतरीन देश कौन सा है। आमतौर पर माना जाता है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जिसके चलते विदेशी निवेशक यहां सबसे ज्यादा आकर्षित होंगे। लेकिन वैश्विक इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की ताजा रिपोर्ट ने इस धारणा को बदल दिया है। गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि भारत की लंबी अवधि की कहानी भले ही मजबूत हो, लेकिन मौजूदा समय में दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजार निवेश के लिए भारत से कहीं ज्यादा आकर्षक नजर आ रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद क्यों मजबूत हैं उत्तर एशिया के बाजार?
पिछले दो वर्षों से लगातार यह चर्चा गर्म है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयर बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव देखा गया। हालांकि, गोल्डमैन सैक्स का विश्लेषण इस तर्क को खारिज करता है। बैंक के मुताबिक, अगर बाजार सिर्फ विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री से चलता, तो दक्षिण कोरिया इस समय सबसे कमजोर बाजार होना चाहिए था। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल विदेशी निवेशकों ने दक्षिण कोरिया के बाजार में करीब 100 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं, जबकि भारत में यह बिकवाली महज 20 अरब डॉलर के मध्य स्तर पर रही है। इसके बावजूद दक्षिण कोरिया और ताइवान का बाजार भारत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
कॉर्पोरेट अर्निंग्स का वो बड़ा अंतर जिसने भारत को पीछे छोड़ा
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में जिस सबसे महत्वपूर्ण कारक पर जोर दिया गया है, वह है कॉर्पोरेट अर्निंग्स (कंपनियों की कमाई)। किसी भी देश का शेयर बाजार अंततः वहां की कंपनियों के मुनाफे पर निर्भर करता है। इस मोर्चे पर भारत फिलहाल उत्तर एशियाई देशों से काफी पीछे छूटता दिखाई दे रहा है:
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दक्षिण कोरिया: इस साल यहां की कंपनियों की कमाई में रिकॉर्ड 320 फीसदी की भारी बढ़ोतरी का अनुमान है।
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ताइवान: इस बाजार में कंपनियों की अर्निंग्स लगभग 48 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है।
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भारत: भारतीय कंपनियों की कमाई इस साल करीब 10 फीसदी बढ़ने का अनुमान है (कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद बैंक ने इसे 8% से बढ़ाकर 10% किया है)।
ताइवान और दक्षिण कोरिया की आकर्षक वैल्यूएशन और AI की जादुई रफ्तार
भारत और ताइवान के बाजारों की तुलना काफी दिलचस्प है। भारत का बाजार इस समय लगभग 20.5 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स (Forward Earnings) पर ट्रेड कर रहा है, जबकि ताइवान 21 गुना पर है। यानी दोनों की कीमतें लगभग बराबर हैं, लेकिन ताइवान में इस साल 48% और अगले साल 30% की अर्निंग ग्रोथ का अनुमान है, जो भारत के 10% और 13% के मुकाबले कहीं ज्यादा आकर्षक है। दूसरी तरफ, दक्षिण कोरिया का बाजार महज 6.6 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स पर ट्रेड कर रहा है, जो बेहद सस्ती वैल्यूएशन को दर्शाता है।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर चल रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दौड़ इन दोनों देशों के लिए वरदान साबित हो रही है। एआई को चलाने के लिए आवश्यक शक्तिशाली सेमीकंडक्टर, चिप्स और हार्डवेयर की पूरी ग्लोबल सप्लाई चेन पर दक्षिण कोरिया और ताइवान का नियंत्रण है। साल 2030 तक कंप्यूटिंग पावर की मांग 24 गुना बढ़ने वाली है और बड़ी टेक कंपनियां एआई पर 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करने जा रही हैं, जिसका सीधा फायदा इन दोनों देशों को मिल रहा है।
भारतीय निवेशकों के लिए अच्छी खबर और भविष्य की राह
हालांकि, गोल्डमैन सैक्स भारत को लेकर पूरी तरह निराश नहीं है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई कमी ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव कम किया है और रुपया भी संभला है, जिसके कारण निफ्टी की अर्निंग ग्रोथ का अनुमान सुधरा है। बैंक का साफ कहना है कि जिस दिन भारतीय कंपनियां लगातार तेज और टिकाऊ मुनाफा कमाने लगेंगी, वैश्विक निवेशकों का भरोसा भारत पर सबसे ज्यादा मजबूत हो जाएगा। आम निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सबक यही है कि लंबे समय में बाजार सिर्फ खबरों से नहीं, बल्कि कंपनियों की वास्तविक कमाई से चलता है।