स्टार्टअप्स के लिए सुस्त रही वीसी फंडिंग: क्या 'सेमिकॉन 2' के बाद पूरी तरह बदल जाएगी देश की तस्वीर
भारतीय टेक इकोसिस्टम में पिछले कुछ समय से हाई-टेक स्टार्टअप्स के लिए वेंचर कैपिटल (VC) फंडिंग की रफ्तार थोड़ी धीमी और कमजोर बनी हुई है। ग्लोबल अनिश्चितताओं और निवेशकों के सतर्क रुख के कारण शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को मनमुताबिक पूंजी जुटाने में काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। हालांकि, देश में सेमीकंडक्टर मिशन के विस्तार और बहुप्रतीक्षित 'सेमिकॉन 2.0' (Semicon 2) की सुगबुगाहट के बीच अब यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या इस नई नीति के आने से डीप-टेक और हार्डवेयर स्टार्टअप्स की किस्मत पलट जाएगी?
हाई-टेक और डीप-टेक स्टार्टअप्स के सामने फंडिंग की बड़ी चुनौती
मौजूदा समय में निवेशकों ने किसी भी नए वेंचर में पैसा लगाने से पहले उसके फंडामेंटल्स, रेवेन्यू मॉडल और प्रॉफिटेबिलिटी पर बारीकी से नजर रखना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) और कंज्यूमर इंटरनेट के अलावा उन स्टार्टअप्स को फंडिंग मिलने में दिक्कतें आ रही हैं जो हार्डवेयर, सेमीकंडक्टर, एआई और रोबोटिक्स जैसे हाई-टेक सेक्टर्स से जुड़े हैं। इन सेक्टर्स में रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) के लिए भारी-भरकम पूंजी की जरूरत होती है, और वीसी फंडिंग के कमजोर होने से इन कंपनियों की ग्रोथ पर ब्रेक लग गया है।
सरकार का सेमीकंडक्टर मिशन और 'सेमिकॉन 2' से उम्मीदें
इस निराशा के बीच भारत सरकार का महत्वाकांक्षी सेमीकंडक्टर मिशन टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है। देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए सरकार अब 'सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम' के अगले चरण यानी 'सेमिकॉन 2' को लॉन्च करने की तैयारी में है। जानकारों का मानना है कि इस दूसरे चरण में केवल चिप निर्माताओं को ही नहीं, बल्कि डिजाइन, फैब्रिकेशन और चिप पर आधारित इनोवेटिव स्टार्टअप्स को भी बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता, इंसेंटिव्स और बुनियादी ढांचा मुहैया कराया जाएगा।
क्या वीसी फंडिंग के ठप बाजार में आएगी नई जान?
जैसे-जैसे सरकार चिप डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत कर रही है, वैसे-वैसे ग्लोबल और घरेलू निवेशकों का ध्यान इस क्षेत्र की ओर तेजी से आकर्षित हो रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 'सेमिकॉन 2' के धरातल पर उतरने के बाद वीसी और प्राइवेट इक्विटी फंड्स का नजरिया पूरी तरह बदल सकता है। जब सरकार खुद इस सेक्टर में भारी निवेश और सपोर्ट का भरोसा दे रही है, तो वेंचर कैपिटलिस्ट्स भी हाई-टेक और डीप-टेक स्टार्टअप्स में बड़ा जोखिम उठाने के लिए आगे आएंगे, जिससे लंबे समय से सुस्त पड़ी फंडिंग में एक नया उछाल देखने को मिल सकता है।