US Court Blocks Trump H-1B Visa Fee: अमेरिका से आई बड़ी राहत खबर! $100,000 की H-1B वीजा फीस पर रोक, जानें पूरी खबर

US Court Blocks Trump H-1B Visa Fee: अमेरिका से आई बड़ी राहत खबर! $100,000 की H-1B वीजा फीस पर रोक, जानें पूरी खबर

अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी संघीय अपील अदालत (US Court of Appeals) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें नए H-1B वीजा पर लगाए गए $100,000 (लगभग ₹95 लाख) की भारी-भरकम फीस पर निचली अदालत के स्टे को हटाने की मांग की गई थी।

बोस्टन स्थित 'फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स' (1st US Circuit Court of Appeals) की तीन जजों की पीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसने इस फीस को असंवैधानिक और गैर-कानूनी करार दिया था।

अदालत ने क्यों खारिज की $100,000 की वीजा फीस?

अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट जज लियो टी. सोरोकिन ने 8 जून 2026 को दिए अपने ऐतिहासिक आदेश में कहा था कि संसद (US Congress) की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति द्वारा इतनी बड़ी राशि वसूलना एक तरह का 'अवैध टैक्स' (Unlawful Tax) है।

  • अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर इस याचिका में साबित किया गया कि राष्ट्रपति के पास केवल घोषणापत्र (Presidential Proclamation) जारी करके नया टैक्स या अत्यधिक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।

  • सुप्रीम कोर्ट का हवाला: अपील अदालत ने 1989 के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब तक संसद स्पष्ट रूप से कोई अधिकार न दे, कार्यपालिका किसी कंपनी या नागरिक पर नया वित्तीय बोझ नहीं डाल सकती।

ट्रंप प्रशासन का क्या था तर्क?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2025 में H-1B वीजा स्पॉन्सर करने वाली कंपनियों पर $100,000 का शुल्क लगाने का आदेश दिया था। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि अमेरिकी कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए H-1B वीजा का गलत इस्तेमाल करती हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छिन जाती हैं। इस भारी फीस का मकसद कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को बुलाने से हतोत्साहित करना था।

भारतीय आईटी पेशेवरों और टेक कंपनियों को क्या होगी राहत?

H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां हर साल विज्ञान, इंजीनियरिंग और आईटी जैसे क्षेत्रों में 85,000 कुशल विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं। इस कोटे का लगभग 70 से 75% हिस्सा भारतीय पेशेवरों को मिलता है।

  • पुरानी फीस व्यवस्था: इस नए नियम से पहले अमेरिकी कंपनियों को प्रति कर्मचारी केवल $2,000 से $5,000 (लगभग ₹1.6 लाख से ₹4.1 लाख) की फीस देनी पड़ती थी।

  • अब क्या होगा: अपील कोर्ट के फैसले के बाद जब तक मुख्य मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक ट्रंप प्रशासन $100,000 की नई फीस नहीं वसूल सकता। कंपनियां पुरानी दर पर ही नए वीजा आवेदन दायर कर सकेंगी।

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