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बैंकों में मची होड़! ब्याज दरें गिरते ही जून में जुटा डाले ₹1 लाख करोड़, जानिए क्या है नया गणित

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में इस समय फंड जुटाने की जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। बाजार में ब्याज दरों में आई हालिया गिरावट का फायदा उठाने के लिए देश के वाणिज्यिक बैंकों ने शॉर्ट-टर्म रिसोर्सेज यानी अल्पकालिक फंड जुटाने की रफ्तार को काफी तेज कर दिया है। इसके लिए बैंक बड़े पैमाने पर सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) जारी कर रहे हैं। बैंकिंग सूत्रों और ताजा वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के जून महीने में ही बैंकों ने सीडी (CD) के जरिए बाजार से करीब 1 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जुटा ली है। बाजार के जानकारों का कहना है कि लिक्विडिटी की स्थिति को बेहतर बनाए रखने और क्रेडिट ग्रोथ यानी लोन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बैंकों ने यह आक्रामक रुख अपनाया है।

ब्याज दरों में कटौती का बैंकों ने उठाया पूरा फायदा पिछले कुछ समय से बाजार में ब्याज दरों का रुख नीचे की ओर बना हुआ है। दरों में आई इस नरमी ने बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत को काफी कम कर दिया है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो बैंकों को फंड जुटाने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ता है, जिससे उनका कॉस्ट ऑफ फंड बढ़ जाता है। लेकिन जैसे ही ब्याज दरों में गिरावट का दौर शुरू हुआ, बैंकों ने बिना वक्त गंवाए कम लागत पर मोटी रकम जुटाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया। यही वजह है कि जून के महीने में सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट जारी करने की गतिविधि में अचानक एक बड़ा उछाल दर्ज किया गया है।

लोन की बढ़ती मांग को पूरा करने की बड़ी तैयारी इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों और स्थानीय बाजारों में रिटेल से लेकर कॉर्पोरेट लोन की मांग में लगातार तेजी देखी जा रही है। विशेष रूप से महानगरीय और औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी लोन की आवश्यकता बढ़ी है। इस स्थानीय और क्षेत्रीय ऋण मांग (Geographical Credit Demand) को समय पर पूरा करने के लिए बैंकों को अपने पास पर्याप्त नकदी बनाए रखनी होगी। जून में जुटाए गए इस 1 लाख करोड़ रुपये के फंड का एक बड़ा हिस्सा इसी लोन ग्रोथ को सपोर्ट करने और देश के विभिन्न क्षेत्रों में क्रेडिट फ्लो को सुचारू बनाए रखने में इस्तेमाल किया जाएगा।

आधुनिक बैंकिंग और लिक्विडिटी मैनेजमेंट का नया दौर आज के दौर में जब एआई और आधुनिक जनरेटिव तकनीक वित्तीय बाजारों की चाल को तेजी से प्रभावित कर रही हैं, बैंक भी अपने लिक्विडिटी मैनेजमेंट को बेहद स्मार्ट और डायनेमिक बना रहे हैं। बैंक अब पारंपरिक तरीकों के बजाय रीयल-टाइम डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग करके यह तय कर रहे हैं कि उन्हें कब और किस दर पर बाजार से पैसा उठाना है। जून महीने में रिकॉर्ड मात्रा में सीडी जारी करना इसी आधुनिक वित्तीय रणनीति का हिस्सा है, जिससे बैंकों को कम समय में और कम लागत पर अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में बड़ी सफलता मिली है।

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