विदेश में बैठे भारतीयों की बल्ले-बल्ले! SEBI ला रहा है KYC का सबसे आसान तरीका, खत्म होगा बैंक जाने का झंझट
पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों यानी अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए निवेश की राह को और आसान बनाने की बड़ी तैयारी कर रहा है। अक्सर देखा जाता है कि देश के बाहर रहने वाले भारतीयों को भारत के शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करने के लिए जटिल कागजी कार्रवाई और 'नो योर कस्टमर' (KYC) प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। लेकिन अब सेबी इस पूरी प्रक्रिया का कायाकल्प करने जा रहा है, जिससे एनआरआई को अपनी री-वेरिफिकेशन या नई केवाईसी के लिए फिजिकली बैंक शाखाओं में जाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
डिजिटल युग में डिजिटल समाधान: घर बैठे होगी इन-पर्सन वेरिफिकेशन
वर्तमान नियमों के मुताबिक, कई मामलों में एनआरआई निवेशकों को इन-पर्सन वेरिफिकेशन (IPV) के लिए खुद बैंक की शाखा में उपस्थित होना पड़ता था या फिर दूतावास (Embassy) के अधिकारियों से दस्तावेजों को प्रमाणित कराना पड़ता था। सेबी अब तकनीक का इस्तेमाल करके इस प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस बनाने पर विचार कर रहा है। नए प्रस्तावों के तहत, वीडियो आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया (V-CIP) और अन्य आधुनिक डिजिटल तौर-तरीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे सात समंदर पार बैठा व्यक्ति भी चंद मिनटों में अपनी केवाईसी प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूरा कर सकेगा।
भारतीय बाजारों में एनआरआई निवेश को बढ़ावा देने की कवायद
विशेषज्ञों का मानना है कि: "इस कदम से न केवल प्रवासी भारतीयों का समय और पैसा बचेगा, बल्कि भारत के वित्तीय बाजारों में विदेशी पूंजी का प्रवाह भी तेजी से बढ़ेगा। सरलीकृत डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया से युवा एनआरआई निवेशक भी भारत की विकास कहानी (Growth Story) का हिस्सा बनने के लिए आकर्षित होंगे।"
सेबी इस संबंध में विभिन्न बैंकों, स्टॉकमार्केट एक्सचेंजों और डिजिटल सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर एक मजबूत और सुरक्षित फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है। इसमें सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि किसी भी प्रकार के वित्तीय फ्रॉड से बचा जा सके।
स्थानीय स्तर पर बैंकों और ब्रोकिंग फर्म्स को भी मिलेगा फायदा
इस फैसले का सीधा असर भारत में मौजूद बैंकिंग सेक्टर्स और डिजिटल ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी देखने को मिलेगा। स्थानीय स्तर पर बैंकों को अब एनआरआई ग्राहकों को संभालने के लिए मैन्युअल डॉक्युमेंटेशन की लंबी प्रक्रियाओं से मुक्ति मिलेगी। इससे बैंकों की परिचालन लागत (Operational Cost) कम होगी और वे कम समय में ज्यादा से ज्यादा एनआरआई खाते खोल सकेंगे। आने वाले कुछ ही हफ्तों में सेबी इस नई गाइडलाइन का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर सकता है।