जुलाई में प्राइवेट सेक्टर की ग्रोथ धड़ाम, PMI 3 साल के निचले स्तर पर पहुंचा
भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। देश के प्राइवेट सेक्टर की मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की रफ्तार में जुलाई महीने के दौरान भारी सुस्ती देखी गई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारत का कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) गिरकर पिछले 3 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मांग में आई कमी और बढ़ती लागत के चलते यह गिरावट दर्ज की गई है।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टरों पर पड़ा असर
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर देश के मुख्य व्यावसायिक स्तंभों पर पड़ा है। जहां एक तरफ नए ऑर्डर्स मिलने की रफ्तार धीमी हुई है, वहीं दूसरी तरफ कंपनियों को अपने परिचालन (Operations) में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू बाजार में महंगाई के दबाव के कारण प्राइवेट कंपनियों ने नए निवेश और प्रोडक्शन में थोड़ी सावधानी बरतनी शुरू कर दी है, जिसका सीधा असर इस महीने के आंकड़ों में साफ झलक रहा है।
क्या कहते हैं आर्थिक विशेषज्ञ?
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, भले ही यह गिरावट 3 साल के निचले स्तर पर है, लेकिन भारतीय बाजार में अब भी रिकवरी की उम्मीदें बाकी हैं। आने वाले त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से इस सेक्टर को फिर से बूस्ट मिल सकता है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्राइवेट कंपनियों को अपनी रणनीतियों में बदलाव करने और लागत को नियंत्रित करने पर ध्यान देने की जरूरत होगी, ताकि आने वाले महीनों में इस सुस्ती से निपटा जा सके।