LPG vs PNG: क्या बंद हो जाएंगे रसोई गैस सिलेंडर? सरकार के नए नियमों और PNG कनेक्शन की असली सच्चाई समझें
देश भर में रसोई गैस उपभोक्ताओं के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि सरकार पारंपरिक एलपीजी (LPG) सिलेंडर को पूरी तरह बंद करने जा रही है और हर घर के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इस तरह की खबरों ने आम उपभोक्ताओं के मन में भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। हालांकि, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के वास्तविक नियमों और दिशा-निर्देशों को समझने पर पूरी तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाती है।
क्या पूरे देश में बंद हो रहे हैं रसोई गैस सिलेंडर?
यह दावा पूरी तरह भ्रामक है कि पूरे देश में एलपीजी सिलेंडर मिलना बंद हो जाएगा। सरकार ने सामान्य उपभोक्ताओं के सिलेंडर बंद करने का कोई एकमुश्त आदेश जारी नहीं किया है। भारत के ग्रामीण इलाकों, कस्बों और उन शहरी क्षेत्रों में जहां अभी तक गैस पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा नहीं पहुंचा है, वहां पहले की तरह ही सामान्य रूप से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति जारी रहेगी।
किन क्षेत्रों और उपभोक्ताओं पर लागू होगा नया नियम?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी संशोधनों और दिशा-निर्देशों का मुख्य दायरा उन विशिष्ट क्षेत्रों और हाउसिंग सोसायटियों तक सीमित है, जहां पीएनजी नेटवर्क पूरी तरह चालू (Operational) हो चुका है:
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दोहरे कनेक्शन पर रोक: आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत संशोधित नियमों के मुताबिक, एक ही उपभोक्ता या परिवार एक साथ सक्रिय पीएनजी कनेक्शन और घरेलू एलपीजी सिलेंडर दोनों नहीं रख सकता।
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पीएनजी वाले क्षेत्रों में अनिवार्यता: जिन कॉलोनियों और सोसायटियों में पाइपलाइन से गैस की सप्लाई शुरू हो चुकी है, वहां रहने वाले उपभोक्ताओं को नोटिस मिलने के बाद तय समय-सीमा के भीतर पीएनजी कनेक्शन में शिफ्ट होने को कहा जा रहा है।
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एलपीजी रिफिल पर रोक: यदि किसी घर में पीएनजी चालू हो जाता है, तो तेल विपणन कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) उस पते पर घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रिफिल डिलीवरी रोक देती हैं।
पीएनजी अपनाने पर क्यों जोर दे रही है सरकार?
भारत अपनी घरेलू एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% हिस्सा विदेशों से आयात करता है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण देश के खजाने पर भारी सब्सिडी और आयात बिल का बोझ पड़ता है।
पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का दायरा बढ़ाने से जहां एक ओर सरकारी आयात खर्च में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को सिलेंडर की बुकिंग, डिलीवरी में देरी और सुरक्षा से जुड़े जोखिमों से राहत मिलेगी। इसके अलावा, पीएनजी को एलपीजी की तुलना में अधिक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है।
LPG सिलेंडर सरेंडर और रिफंड की प्रक्रिया
यदि आपके क्षेत्र में पीएनजी कनेक्शन सक्रिय हो चुका है, तो आपको अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होता है:
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उपभोक्ता को अपने गैस वितरक (Distributor) के पास जाकर या आधिकारिक पोर्टल के जरिए सरेंडर फॉर्म भरना होता है।
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खाली सिलेंडर और रेगुलेटर एजेंसी को वापस जमा करना पड़ता है।
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गैस एजेंसी इसके बदले 'टर्मिनेशन वाउचर' (TV) जारी करती है और कनेक्शन लेते समय जमा की गई सिक्योरिटी डिपॉजिट राशि सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में वापस ट्रांसफर कर दी जाती है।