ITR Form Selection Rules: नौकरीपेशा लोग न करें ये बड़ी गलती, इनकम टैक्स का 'डिफेक्टिव रिटर्न' नोटिस आने से पहले जान लें ITR-1 और ITR-2 का ये कड़ा नियम

ITR Form Selection Rules: नौकरीपेशा लोग न करें ये बड़ी गलती, इनकम टैक्स का 'डिफेक्टिव रिटर्न' नोटिस आने से पहले जान लें ITR-1 और ITR-2 का ये कड़ा नियम

देश में इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) फाइल करने का सीजन शुरू होते ही अधिकांश नौकरीपेशा लोग बिना सोचे-समझे सीधे ITR-1 (सहज फॉर्म) को चुन लेते हैं। माना कि यह टैक्स विभाग का सबसे आसान फॉर्म है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार इसे सिर्फ इसलिए नहीं चुनना चाहिए क्योंकि यह भरने में बहुत सरल है।

मुंबई के जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) सुरेश सुराना के मुताबिक, अगर आपने पूरे सालभर के दौरान शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट या विदेशी संपत्ति से जुड़ा कोई भी छोटा-बड़ा लेन-देन किया है, तो आप ITR-1 फॉर्म भरने के लिए पूरी तरह अयोग्य हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में आपको नियमों के अनुसार ITR-2 या ITR-3 फॉर्म ही चुनना होगा। अगर आप गलती से भी गलत फॉर्म चुन लेते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग आपको 'डिफेक्टिव रिटर्न' (दोषपूर्ण रिटर्न) का नोटिस भेज सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं वे 10 बड़े मामले, जिनमें आपके लिए ITR-1 फॉर्म भरना कानूनी रूप से मना है।

1. शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG)

अगर आपने शेयर बाजार में लिस्टेड शेयर्स या इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स को खरीदकर 1 साल की अवधि पूरा होने से पहले ही बेच दिया है और उस पर आपको शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन हुआ है, तो आप ITR-1 नहीं भर सकते। इस कमाई को घोषित करने के लिए आपको ITR-2 फॉर्म चुनना अनिवार्य होगा।

2. ₹1.25 लाख से ज्यादा का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG)

अगर लिस्टेड शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड्स को लंबे समय तक रखने के बाद बेचने पर आपको आयकर अधिनियम की धारा 112A के तहत एक वित्त वर्ष में ₹1.25 लाख से अधिक का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन हुआ है, तो आपके लिए ITR-1 का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है।

3. जमीन, मकान, कमर्शियल प्रॉपर्टी या सोना बेचना

यदि आपने सालभर में कोई प्रॉपर्टी (जैसे खाली जमीन, फ्लैट या कमर्शियल बिल्डिंग), ज्वेलरी या फिर डेट म्यूचुअल फंड बेचा है, तो उससे होने वाली कुल कमाई को आपको 'कैपिटल गेन्स शेड्यूल' (Capital Gains Schedule) में दिखाना होता है। यह विशेष शेड्यूल ITR-1 फॉर्म में उपलब्ध नहीं होता है, इसलिए इसके लिए ITR-2 भरना अनिवार्य है।

4. बिजनेस या स्वतंत्र प्रोफेशन से होने वाली आमदनी

अगर आप सैलरीड एम्प्लॉई होने के साथ-साथ फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, किसी अन्य तरह के स्वतंत्र प्रोफेशन या खुद के छोटे-मोटे बिजनेस से भी कमाई करते हैं, तो आप ITR-1 नहीं चुन सकते। ऐसे मामलों में आपको सीधे ITR-3 फॉर्म भरना पड़ता है, बशर्ते आप प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत ITR-4 के योग्य न हों।

5. F&O और इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday/Derivative Trading)

शेयर बाजार में रोजाना की जाने वाली इंट्राडे ट्रेडिंग या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग से होने वाली कमाई या घाटे को टैक्स की भाषा में 'बिजनेस इनकम' (स्पेक्युलेटिव/नॉन-स्पेक्युलेटिव) माना जाता है। इस तरह के वित्तीय लेन-देन को भी ITR-1 में नहीं दिखाया जा सकता।

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6. अनलिस्टेड शेयरों (Unlisted Shares) में निवेश

अगर आपने किसी ऐसी स्टार्टअप या कंपनी के शेयर खरीद रखे हैं जो फिलहाल घरेलू शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, तो आप पूरे वित्तीय वर्ष में कभी भी ITR-1 फाइल करने के पात्र नहीं रहते हैं।

7. किसी कंपनी में डायरेक्टर का पद संभालना

अगर आप किसी भी छोटी, बड़ी या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में डायरेक्टर (Director) के पद पर कार्यरत हैं, तो आप अपनी सैलरी रिटर्न के लिए ITR-1 का उपयोग नहीं कर सकते। आपको विस्तृत विवरण के लिए ITR-2 या ITR-3 फॉर्म ही भरना होगा।

8. विदेशी संपत्ति या विदेशी बैंक खाता होना

अगर आपके पास भारत की सीमाओं के बाहर कोई रियल एस्टेट प्रॉपर्टी है, किसी विदेशी कंपनी के शेयर्स (जैसे अमेरिकी शेयर बाजार के स्टॉक्स) हैं, या किसी विदेशी बैंक खाते में साइनिंग ऑथोरिटी है, तो आपको ITR-1 के बजाय अन्य फॉर्म्स में मौजूद विस्तृत 'Schedule FA' (फॉरेन एसेट्स) भरना अनिवार्य होगा।

9. विदेश से होने वाली कोई भी अन्य कमाई

यदि आपको विदेश से सैलरी, डिविडेंड, सेविंग्स पर ब्याज या किराए के रूप में कोई भी सोर्स इनकम हो रही है, तो उसकी जानकारी ITR-1 में सबमिट नहीं की जा सकती। इसके लिए ITR-2 या ITR-3 फॉर्म के साथ 'Schedule FSI' और 'Schedule TR' भरना पड़ता है।

10. ₹50 लाख से ज्यादा की कुल कमाई या पुराना घाटा

यदि आपकी कुल सालाना टैक्सेबल इनकम (Taxable Income) सभी स्रोतों को मिलाकर ₹50 लाख से अधिक हो जाती है, तो आप ITR-1 फॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसके अलावा, अगर आपका कोई पुराना बिजनेस या कैपिटल लॉस है जिसे आप इस साल के मुनाफे से एडजस्ट (Set-off/Carry forward) करना चाहते हैं, या फिर लॉटरी व घुड़दौड़ जैसी स्पेशल केटेगरी से बड़ी कमाई हुई है, तो भी आपके लिए ITR-1 मान्य नहीं होगा।

टैक्स एक्सपर्ट की अंतिम सलाह: इनकम टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही ITR फॉर्म का चुनाव करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि समय पर रिटर्न फाइल करना। अगर आप अनजाने में गलत फॉर्म चुन लेते हैं, तो टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को इनवैलिड या डिफेक्टिव घोषित कर देगा, जिससे आपका टैक्स रिफंड आने में महीनों की देरी होगी और आपको दोबारा जुर्माना या बिना जुर्माने के 'रिवाइज्ड रिटर्न' दाखिल करना पड़ सकता है। इसलिए फाइनल फाइलिंग से पहले अपने फॉर्म 26AS, AIS और सभी वित्तीय लेन-देन की समीक्षा अपने सीए से जरूर करा लें।

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