विदेशी मुद्रा भंडार को मिला बूस्ट: RBI की स्वैप योजना से आए 72.85 अरब डॉलर, 65.4 अरब डॉलर के FCNR डिपॉजिट ने तोड़ा 2013 का रिकॉर्ड

विदेशी मुद्रा भंडार को मिला बूस्ट: RBI की स्वैप योजना से आए 72.85 अरब डॉलर, 65.4 अरब डॉलर के FCNR डिपॉजिट ने तोड़ा 2013 का रिकॉर्ड

भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू मुद्रा की स्थिरता के मोर्चे पर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू की गई विशेष डॉलर-रुपया (USD-INR) फॉरेक्स स्वैप सुविधा ने विदेशी मुद्रा प्रवाह (Forex Inflows) के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस रियायती स्वैप विंडो के जरिए 21 अगस्त तक देश में कुल 72.85 अरब डॉलर (USD 72.848 Billion) का विदेशी फंड जुटाया जा चुका है। इस ऐतिहासिक इनफ्लो में सबसे बड़ा योगदान गैर-निवासी भारतीयों द्वारा जमा किए गए विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक यानी FCNR(B) डिपॉजिट्स का रहा है, जिसने अकेले 65.4 अरब डॉलर (USD 65.397 Billion) का भारी समर्थन जुटाया है।

90% हिस्सेदारी के साथ FCNR(B) बना मुख्य गेमचेंजर

आरबीआई ने चालू वर्ष में 8 जून को तीन प्रमुख चैनलों—एफसीएनआर(बी) जमा, विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ECBs) और ओवरसीज विदेशी मुद्रा उधारी (OFCBs)—के लिए विशेष स्वैप विंडो शुरू की थी।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुटाए गए कुल फंड का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा केवल FCNR(B) डिपॉजिट्स के जरिए आया है। अन्य चैनलों में ओवरसीज बॉरोइंग्स (OFCBs) के माध्यम से 4.86 अरब डॉलर और ईसीबी (ECBs) के जरिए 2.59 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। यह मोबिलाइजेशन जुलाई के अंत से अगस्त के तीसरे सप्ताह के बीच तेजी से बढ़ा, जहां मात्र तीन हफ्तों के भीतर 28.6 अरब डॉलर से अधिक की ताजा एफसीएनआर पूंजी भारत आई।

साल 2013 के ऐतिहासिक संकट के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ा

यह वर्तमान विदेशी मुद्रा मोबिलाइजेशन साल 2013 के 'टेपर टैंट्रम' संकट के दौरान पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के कार्यकाल में शुरू की गई प्रसिद्ध स्वैप योजना से भी कहीं अधिक विशाल साबित हुआ है। 2013 के दौरान भारत ने एफसीएनआर के जरिए करीब 26 अरब डॉलर और कुल मिलाकर 34 अरब डॉलर जुटाए थे। इसके मुकाबले मौजूदा स्वैप विंडो में अब तक 72.85 अरब डॉलर का फंड आकर्षित हो चुका है, जो पिछले रिकॉर्ड से दोगुने से भी अधिक है।

सरकारी बैंकों ने झोंकी पूरी ताकत: एसबीआई और बीओबी का आक्रामक टारगेट

इस योजना की सफलता में देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सक्रिय भागीदारी ने अहम भूमिका निभाई है:

  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI): देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक एसबीआई ने पहले ही करीब 6 अरब डॉलर का एफसीएनआर फंड जुटा लिया है और वह 10 अरब डॉलर के लक्ष्य पर काम कर रहा है।

  • बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda): बैंक ऑफ बड़ौदा ने एफसीएनआर और ओवरसीज बॉरोइंग्स के जरिए 4 से 5 अरब डॉलर का लक्ष्य तय किया है।

  • इंडियन बैंक: इंडियन बैंक ने भी इस विंडो के तहत 2 अरब डॉलर जुटाने का आक्रामक लक्ष्य रखा है।

बैंकों ने अनिवासी भारतीयों (NRIs) को आकर्षित करने के लिए 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले डॉलर डिपॉजिट्स पर आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश की, जिसे आरबीआई द्वारा रियायती स्वैप दर का समर्थन मिला।

रुपए की मजबूती और विदेशी मुद्रा भंडार पर क्या होगा असर?

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर इंडेक्स के दबाव के बीच 72.85 अरब डॉलर का यह ताजा विदेशी मुद्रा प्रवाह भारतीय रिजर्व बैंक को कई रणनीतिक लाभ प्रदान करेगा:

  • विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को मजबूती: भारी डॉलर इनफ्लो से देश का विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया है, जिससे कई महीनों के आयात कवर को मजबूती मिली है।

  • रुपए के अवमूल्यन पर ब्रेक: विदेशी फंड्स की बाढ़ ने खुले बाजार में डॉलर की मांग को संतुलित किया है, जिससे भारतीय मुद्रा (INR) को मजबूती और स्थिरता मिली है।

  • घरेलू बैंकिंग लिक्विडिटी में सुधार: जब बैंक डॉलर को आरबीआई के पास स्वैप करते हैं, तो केंद्रीय बैंक सिस्टम में समान मात्रा में भारतीय रुपया छोड़ता है, जिससे त्योहारी सीजन से पहले बैंकिंग सिस्टम में नकदी (Liquidity) की स्थिति मजबूत हुई है।

डेडलाइन और आगे की समय-सीमा

उम्मीद से कहीं बेहतर और जबरदस्त रिस्पॉन्स मिलने के कारण आरबीआई ने एफसीएनआर(बी) जमा जुटाने की प्रारंभिक समय-सीमा को छोटा करते हुए 31 अगस्त तक सीमित कर दिया है। हालांकि, भारतीय कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के लिए बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) और विदेशी उधारी (OFCB) के तहत स्वैप सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी। आरबीआई का यह कदम भारतीय वित्तीय प्रणाली की वैश्विक साख और विदेशी निवेशकों के अटूट भरोसे को दर्शाता है।

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