क्या पहले से चल रही EMI आपकी पर्सनल लोन एप्रूवल की राह में रोड़ा बन सकती है? जानें डेट-टू-इनकम रेशियो का पूरा सच

क्या पहले से चल रही EMI आपकी पर्सनल लोन एप्रूवल की राह में रोड़ा बन सकती है? जानें डेट-टू-इनकम रेशियो का पूरा सच

अगर आप नए पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने की योजना बना रहे हैं और आपकी जेब पर पहले से ही कुछ मासिक किस्तों (EMIs) का बोझ है, तो यह सवाल आपके मन में आना स्वाभाविक है। अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर उनकी मौजूदा क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी है और वे समय पर अपनी किस्तों का भुगतान कर रहे हैं, तो बैंक उन्हें तुरंत नया लोन दे देगा। हालांकि, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र का वास्तविक गणित थोड़ा अलग तरीके से काम करता है। बैंक केवल आपकी नीयत या पिछले भुगतान रिकॉर्ड को ही नहीं देखते, बल्कि वे आपकी भावी भुगतान क्षमता का भी गहन विश्लेषण करते हैं। जब आपके पास पहले से एक्टिव लोन होते हैं, तो नया पर्सनल लोन मिलने की संभावना पर इसका सीधा असर पड़ता है, और कभी-कभी यह आपके आवेदन के खारिज होने का मुख्य कारण भी बन जाता है।

क्रेडिट स्कोर और आपकी आय पर मौजूदा किस्तों का सीधा असर

बैंकिंग प्रणाली में किसी भी लोन आवेदन को प्रोसेस करते समय 'डेट-टू-इनकम' (DTI) रेशियो सबसे महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। DTI रेशियो यह दर्शाता है कि आपकी कुल मासिक कमाई का कितना प्रतिशत हिस्सा पहले से मौजूद किस्तों को चुकाने में जा रहा है। मान लीजिए आपकी मासिक आय ₹50,000 है और आप हर महीने ₹20,000 अलग-अलग किस्तों में दे रहे हैं, तो आपका DTI रेशियो 40% है। वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि बैंकों के लिए 30% से 40% तक का DTI रेशियो सुरक्षित माना जाता है। यदि आपकी मौजूदा किस्तों का कुल योग आपकी आय के 50% या उससे अधिक हिस्से को कवर कर लेता है, तो बैंक आपको 'हाई-रिस्क बोरॉवर' (अधिक जोखिम वाला उधारकर्ता) की श्रेणी में डाल देते हैं। ऐसी स्थिति में नया पर्सनल लोन मिलना काफी कठिन हो जाता है।

इसके अलावा, आपके क्रेडिट स्कोर पर भी इन किस्तों का दोहरा असर पड़ता है। एक तरफ जहां समय पर किस्तें चुकाने से आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर सुधरता है, वहीं दूसरी तरफ आपकी कुल लोन सीमा (Credit Utilization) का अधिक उपयोग आपके स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यदि आप अपनी आय की सीमा के बहुत करीब जाकर लोन लेते हैं, तो क्रेडिट ब्यूरो इसे 'क्रेडिट हंग्री' व्यवहार मानते हैं। बैंकों को लगता है कि आप अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्यधिक लोन पर निर्भर हैं, जिससे नए लोन के एप्रूवल की संभावना काफी कम हो जाती है।

पर्सनल लोन एप्रूवल के लिए बैंक किन मुख्य कारकों की जांच करते हैं

जब आप एक नए पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक अंडरराइटिंग प्रक्रिया के तहत कई पहलुओं का विश्लेषण करते हैं। इनमें सबसे पहला कारक आपकी कुल डिस्पोजेबल इनकम यानी वह राशि है जो सभी जरूरी खर्चों और किस्तों के बाद बचती है। यदि आपके पास अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और आपातकालीन स्थितियों के लिए पर्याप्त बचत नहीं बचती है, तो बैंक लोन देने से कतराते हैं। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू आपकी नौकरी या व्यवसाय की स्थिरता है। एक प्रतिष्ठित कंपनी में स्थायी नौकरी और नियमित आय वाले आवेदकों को थोड़ा अधिक DTI रेशियो होने पर भी ढील मिल सकती है, जबकि अस्थिर आय वाले व्यक्तियों के लिए नियम काफी सख्त होते हैं।

तीसरा कारक यह है कि आपकी मौजूदा किस्तें किस प्रकार के लोन की हैं। यदि आप होम लोन या कार लोन जैसी सुरक्षित (Secured) किस्तों का भुगतान कर रहे हैं, तो बैंक इसे बहुत ज्यादा नकारात्मक रूप से नहीं देखते। लेकिन यदि आपके पास पहले से ही 2-3 असुरक्षित (Unsecured) लोन जैसे क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन या अन्य पर्सनल लोन चल रहे हैं, तो नया असुरक्षित पर्सनल लोन मिलना बेहद मुश्किल हो जाता है। बैंक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आप नए लोन की EMI को बिना किसी डिफ़ॉल्ट के आसानी से चुका सकेंगे या नहीं।

मौजूदा EMI के बावजूद पर्सनल लोन एप्रूवल की संभावना बढ़ाने के उपाय

यदि आपके पास पहले से कुछ किस्तें चल रही हैं और आपको तत्काल पर्सनल लोन की आवश्यकता है, तो कुछ रणनीतिक कदम उठाकर आप अपनी एप्रूवल की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। सबसे पहला और प्रभावी तरीका यह है कि नया लोन अप्लाई करने से पहले अपने छोटे लोन्स या क्रेडिट कार्ड के बकाए का भुगतान (Pre-closure) कर दें। इससे आपकी कुल मासिक किस्तों का बोझ कम हो जाएगा और आपका DTI रेशियो बैंक के मानक स्तर पर आ जाएगा।

दूसरा तरीका 'को-एप्लिकेंट' (सह-आवेदक) को शामिल करना है। आप अपने परिवार के किसी ऐसे सदस्य को लोन में सह-आवेदक बना सकते हैं जिसकी अपनी एक नियमित आय हो और जिस पर कम या कोई किस्त न चल रही हो। ऐसा करने से आपकी कुल पारिवारिक आय बढ़ जाती है, जिससे लोन एप्रूवल की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, यदि संभव हो तो आप लोन की अवधि (Tenure) लंबी चुन सकते हैं। लंबी अवधि चुनने से आपकी मासिक EMI की राशि कम हो जाएगी, जिससे DTI रेशियो संतुलित दिखेगा। आप अपनी मौजूदा आय के अतिरिक्त स्रोतों, जैसे फ्रीलांसिंग, रेंटल इनकम या पार्ट-टाइम काम के सबूत भी बैंक के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं।

संक्षेप में, पहले से चल रही किस्तें आपके नए पर्सनल लोन की राह में पूरी तरह से रुकावट नहीं बनतीं, लेकिन वे आपकी लोन पात्रता, लोन राशि और ब्याज दर को गहराई से प्रभावित करती हैं। यदि आप अपने वित्तीय प्रबंधन को संतुलित रखते हैं और DTI रेशियो को नियंत्रित रखते हैं, तो मौजूदा किस्तों के बावजूद आसानी से नया लोन प्राप्त कर सकते हैं।

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