विकसित भारत के निर्माण के लिए जल्द बनेगी बैंकिंग हाई-लेवल कमेटी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा ऐलान
केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने देश के आर्थिक विकास को एक नई और तेज रफ्तार देने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा की है। सरकार बहुत जल्द Banking for Viksit Bharat यानी 'विकसित भारत के लिए बैंकिंग' विषय पर एक उच्च स्तरीय समिति (High-Level Committee) का गठन करने जा रही है। यह कमेटी देश के संपूर्ण बैंकिंग ढांचे की व्यापक समीक्षा करेगी और इसे आगामी भारत की विकास आवश्यकताओं के पूरी तरह अनुरूप तैयार करेगी। वित्त मंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय PSB Confluence 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह जानकारी साझा की। सरकार का यह कदम देश को साल 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है।
मजबूत वित्तीय सेहत और रिफॉर्म्स का बिलकुल सही समय
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय बैंकिंग प्रणाली की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आज हमारे बैंक वित्तीय रूप से बेहद मजबूत और सशक्त स्थिति में हैं। बैंकों के बही-खाते (Balance Sheets) पूरी तरह दुरुस्त हैं और वित्तीय घाटे या कहें कि नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स NPA अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। इसके अलावा, देश के 98 प्रतिशत से अधिक गांवों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हो चुकी है, जो वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि चूंकि आज बैंक लाभप्रदता के ऊंचे स्तर पर हैं और परिसंपत्ति की गुणवत्ता (Asset Quality) बेहतरीन है, इसलिए सुधारों (Riforms) को आगे बढ़ाने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए यह सबसे सही और अनुकूल समय है।
सीमित समय सीमा और दो दशकों का लक्ष्य
भारतीय अर्थव्यवस्था के पास अपनी स्थिति को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने के लिए अब दो दशकों से भी कम समय बचा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में दूरगामी बदलाव लाने की ठान ली है। नई दिल्ली में आयोजित मंथन और विचार-विमर्श बैठकों में देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों [PSBs] और वित्तीय संस्थानों के प्रमुख अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। इन दो दिनों की बैठकों में मिलने वाले जमीनी अनुभव, महत्वपूर्ण सुझावों और निष्कर्षों को आने वाली इस हाई-पावर कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। कमेटी को पहले से तैयार किए गए रिसर्च दस्तावेजों और अन्य जरूरी तकनीकी सामग्रियों का पूरा सपोर्ट भी मिलेगा, ताकि वह बिना किसी विलंब के व्यावहारिक और प्रभावी सिफारिशें सरकार को सौंप सके।
वित्तीय स्थिरता, उपभोक्ता संरक्षण और भविष्य की रूपरेखा
प्रस्तावित उच्च स्तरीय समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि देश का बैंकिंग सेक्टर तेज आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ वित्तीय स्थिरता (Financial Stability), वित्तीय समावेश और उपभोक्ता संरक्षण (Consumer Protection) के मानकों पर पूरी तरह खरा उतरे। बदलते दौर की जरूरतों को देखते हुए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों [NBFCs] के लिए भी ऋण वितरण (Credit Disbursement) और तकनीक अपनाने के स्पष्ट और आधुनिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी में कार्यकुशलता बढ़ाने और उनका दायरा बड़ा करने के लिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन [PFC] और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन [REC] जैसे बड़े संस्थानों के पुनर्गठन की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। इन तमाम सुधारों का अंतिम और एकमात्र लक्ष्य भारत के सकल घरेलू उत्पाद [GDP] और आर्थिक वृद्धि को नई ताकत देना है।