Airbag Malfunction: खड़ी कार में अचानक फटा एयरबैग, 25 साल के युवक की दर्दनाक मौत; जानें क्यों जानलेवा बन जाता है यह सेफ्टी फीचर

Airbag Malfunction: खड़ी कार में अचानक फटा एयरबैग, 25 साल के युवक की दर्दनाक मौत; जानें क्यों जानलेवा बन जाता है यह सेफ्टी फीचर

जब भी हम कोई नई या पुरानी कार खरीदने जाते हैं, तो हमारी पहली प्राथमिकता यह देखना होती है कि गाड़ी में कितने एयरबैग्स (Airbags) दिए गए हैं। हम यह मान लेते हैं कि जितने अधिक एयरबैग होंगे, सफर उतना ही सुरक्षित होगा। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि सुरक्षा के लिए बना यही एयरबैग कभी बिना किसी एक्सीडेंट के भी आपकी जान ले सकता है? हाल ही में मुंबई के पास मीरा रोड (Mira Road) इलाके से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ 25 वर्षीय युवक मोहित सोनी की मौत अपनी ही खड़ी कार में अचानक एयरबैग फटने के कारण हो गई। गाड़ी पूरी तरह पार्क थी और बाहर से कोई टक्कर भी नहीं हुई थी, फिर भी यह सेफ्टी सिस्टम काल बन गया। आइए जानते हैं इस दर्दनाक हादसे का पूरा सच और इससे बचने के उपाय।

कैसे हुई यह दर्दनाक घटना: बिना किसी टक्कर के सीधे गर्दन पर लगा प्लास्टिक कवर

पुलिस और चश्मदीदों से मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहित सोनी अपनी करीब 15 साल पुरानी होंडा कार के भीतर बैठे हुए थे। गाड़ी सड़क के किनारे शांति से पार्क की गई थी। तभी अचानक, बिना किसी चेतावनी या सिग्नल के, कार के स्टीयरिंग व्हील में लगा एयरबैग जोरदार धमाके के साथ खुल गया। एयरबैग का जो बाहरी प्लास्टिक कवर होता है, वह इतनी तीव्र रफ्तार और दबाव के साथ बाहर निकला कि सीधे मोहित की गर्दन के दाहिने हिस्से पर जा लगा। यह वार इतना जोरदार था कि मोहित को बेहद गहरी चोट आई और अत्यधिक खून बह जाने के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस की शुरुआती जांच में गाड़ी पर बाहर से किसी भी प्रकार की टक्कर या डेंट के निशान नहीं मिले हैं।

बिना एक्सीडेंट के अचानक गाड़ियों के एयरबैग क्यों फट जाते हैं?

सामान्य नियमों के मुताबिक, कार के एयरबैग तभी एक्टिव होते हैं जब गाड़ी की रफ्तार तेज हो और उसमें आगे या साइड से कोई जोरदार टक्कर (Impact) हो। लेकिन पुरानी कारों या तकनीकी रूप से खराब हो चुके सिस्टम में यह बिना एक्सीडेंट के भी ट्रिगर हो सकते हैं:

  • शॉर्ट सर्किट और सेंसर की खराबी: 10 से 15 साल पुरानी हो चुकी गाड़ियों में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट या सेंसर (Crash Sensors) के बूढ़े होने के कारण वे अचानक गलत सिग्नल भेज देते हैं।

  • जंग और नमी का खतरा: यदि कार में कभी बारिश या बाढ़ का पानी घुसा हो, तो सीट के नीचे या डैशबोर्ड में लगे सेंसर्स में जंग (Rusting) लग जाती है। यह जंग सिस्टम को पूरी तरह से खराब कर देती है, जिससे बिना किसी इम्पैक्ट के भी एयरबैग खुल सकते हैं।

300 किमी/घंटा की रफ्तार: एयरबैग का इतना खतरनाक क्यों खुलना पड़ता है?

तकनीकी रूप से समझें तो एयरबैग को महज कुछ मिलीसेकंड में फुलाने के लिए उसके भीतर एक छोटा सा रासायनिक ब्लास्ट (Chemical Explosion) कराया जाता है, जिससे नाइट्रोजन गैस पैदा होती है। यह ब्लास्ट इतना शक्तिशाली होता है कि इसके खुलने की रफ्तार करीब 300 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है।

यदि कार चलाते या बैठते समय कोई व्यक्ति स्टीयरिंग व्हील के बेहद करीब बैठा हो, तो यह एयरबैग उसे बचाने के बजाय गंभीर रूप से घायल कर सकता है। इसके अलावा, पुरानी गाड़ियों का प्लास्टिक कवर वक्त के साथ कड़क और भंगुर (Brittle) हो जाता है, जो फटने के बाद किसी धारदार हथियार के टुकड़ों की तरह सीधे इंसान के शरीर पर वार करता है। मोहित के मामले में भी यही हार्ड प्लास्टिक कवर जानलेवा साबित हुआ।

डैशबोर्ड की 'Airbag Warning Light' को कभी न करें इग्नोर, तुरंत लें एक्शन

इस तरह के अनचाहे और भयानक हादसों से बचने के लिए कार मालिकों को कुछ बेहद जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले, अपनी कार को समय पर अधिकृत सर्विस सेंटर में जांच कराएं। कार स्टार्ट करते समय डैशबोर्ड पर दिखने वाली 'Airbag Warning Light' पर पैनी नजर रखें। यदि गाड़ी चलने के दौरान भी यह लाइट लगातार जल रही है, तो इसका साफ मतलब है कि एयरबैग सिस्टम में कोई न कोई तकनीकी खराबी (Malfunction) आ चुकी है। इसे कभी भी नजरअंदाज न करें और तुरंत मैकेनिक को दिखाकर कंप्यूटर डायग्नोसिस करवाएं।

10 साल से पुरानी कारों का रखें खास ख्याल, मेंटेन करें 10 इंच का सेफ्टी डिस्टेंस

यदि आपकी कार 10 साल या उससे अधिक पुरानी है, तो उसके पूरे सेफ्टी मैकेनिज्म की जांच किसी मान्यता प्राप्त डीलरशिप या आरटीओ (RTO) प्रमाणित केंद्र से जरूर करवाएं, क्योंकि कई बार एयरबैग के भीतर इस्तेमाल होने वाले केमिकल और सेंसर्स की एक निश्चित एक्सपायरी डेट होती है। इसके अलावा, कार चलाते समय या पैसेंजर सीट पर बैठते समय हमेशा स्टीयरिंग व्हील और डैशबोर्ड से कम से कम 10 इंच की सुरक्षित दूरी बनाकर बैठें। इससे यदि कभी आपातकालीन स्थिति में एयरबैग खुलता भी है, तो वह पूरी तरह खुलने के बाद आपके सीने को छुएगा, जिससे सीधे चोट लगने का खतरा न के बराबर हो जाएगा। आपकी थोड़ी सी जागरूकता आपको और आपके परिवार को सुरक्षित रख सकती है।

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