सिंगापुर, UAE और चीन से चुपचाप भारत से बाहर चले गए ₹1.29 लाख करोड़, इनकम टैक्स विभाग की जांच में बड़ा खुलासा
भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय गलियारों में इस समय हलचल मचा देने वाली एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। देश के आयकर विभाग (Income Tax Department) ने विदेशी मुद्रा भेजने (Overseas Remittance) के एक बहुत बड़े और सुनियोजित फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। हाल ही में सामने आई जांच रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत से चुपचाप लगभग 1.29 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम विदेशों में भेज दी गई है। इस अवैध या संदिग्ध वित्तीय हेराफेरी में देश की कई ऐसी नई और संदिग्ध संस्थाओं के नाम शामिल हैं जिनका कारोबार या तो शून्य था या फिर बेहद मामूली था, लेकिन उनके जरिए देश का भारी पैसा विदेश ट्रांसफर कर दिया गया। इस खुलासे के बाद से केंद्रीय एजेंसियां और वित्त मंत्रालय पूरी तरह सतर्क हो गया है और इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है।
किन देशों में गया सबसे ज्यादा पैसा?
जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत से बाहर भेजे गए इस कुल 1.29 लाख करोड़ रुपये के फंड का एक बहुत बड़ा हिस्सा यानी करीब 72.3 प्रतिशत हिस्सा दुनिया के चुनिंदा देशों में डंप किया गया है। इस सूची में सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), हांगकांग, मॉरीशस और चीन जैसे देश प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन देशों में भी सबसे ज्यादा पैसा सिंगापुर भेजा गया है, जहाँ अकेले लगभग 41,885 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। इसके अलावा, यूएई (UAE) में 18,331 करोड़ रुपये और हांगकांग में 18,064 करोड़ रुपये से अधिक की रकम भेजी गई है। मॉरीशस और चीन जैसे देशों के रास्ते भी बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन किए जाने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं, जिसने टैक्स अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।
6,422 नई और संदिग्ध संस्थाएं रडार पर
आयकर विभाग की शुरुआती और गहन छानबीन में यह बात सामने आई है कि इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए कुल 6,422 नई संस्थाओं का इस्तेमाल किया गया है। इनमें से शुरुआती तौर पर 394 प्रमुख फर्मों और कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, लगभग 83 ऐसी विदेशी पतों वाली संस्थाओं की पहचान की गई है जिनके जरिए अकेले ही 36,175 करोड़ रुपये देश से बाहर भेज दिए गए। इन सभी कंपनियों की ओनरशिप, उनके बिजनेस मॉडल, उनकी वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों और क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन के पैटर्न की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि आखिर इस पैसे का असली मालिक कौन था और इसे किस मकसद से बाहर भेजा गया।
फंड ट्रांसफर की रफ्तार और अजीब बहाने
टैक्स और रेवेन्यू विभाग के अधिकारियों के लिए सबसे ज्यादा चिंता का विषय पैसे भेजने की यह रफ्तार है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान ही लगभग 43,048 करोड़ रुपये विदेश भेजे जा चुके हैं, जो कि पिछले पूरे वित्त वर्ष के कुल आंकड़ों का करीब 78 प्रतिशत है। जब इन कंपनियों से विदेश पैसे भेजने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही अजीब और कागजी बहाने बनाए। जांच में पता चला कि लगभग 44,474 करोड़ रुपये को 'लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन' (LTCG) के रूप में दिखाया गया, जबकि 27,128 करोड़ रुपये को अन्य आय यानी 'अदर इनकम' और करीब 16,423 करोड़ रुपये को माल भाड़े यानी 'फ्रेट चार्जेस' के नाम पर विदेश ट्रांसफर किया गया था।
रुपये पर दबाव और भारतीय रिजर्व बैंक की चिंताएं
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय रुपया विदेशी मुद्रा बाजार में लगातार दबाव का सामना कर रहा है। रुपये की इस कमजोरी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार हो रही गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को लगातार बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ रहा है और डॉलर बेचने पड़ रहे हैं। ऐसे नाज़ुक दौर में देश के भीतर से चुपचाप इतने बड़े पैमाने पर पूंजी का बाहर निकल जाना भारतीय अर्थव्यवस्था के मैक्रो-इकोनॉमिक संतुलन के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। बहरहाल, वित्त मंत्रालय, प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग की संयुक्त टीमें इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह टैक्स चोरी का मामला है या फिर मनी लॉन्ड्रिंग का कोई बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र है।