बिहार टेंडर घोटाला: 'रिशु श्री' केस में बड़ा एक्शन, वित्त विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी निलंबित
बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचाने वाले चर्चित 'रिशु श्री टेंडर घोटाला' मामले में सम्राट चौधरी सरकार ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। राज्य के वित्त विभाग में तैनात बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के अधिकारी और तत्कालीन संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी को सरकार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह निलंबन स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) द्वारा सात आरोपियों के खिलाफ दायर की गई 4,000 पन्नों की चार्जशीट के बाद हुआ है, जिसमें मुमुक्षु चौधरी का नाम प्रमुखता से शामिल है।
टेंडर घोटाला: क्या है पूरा खेल?
जांच एजेंसियों के अनुसार, पटना के ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री ने एक ऐसा सिंडिकेट बना रखा था, जो सरकारी विभागों के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर को 'मैनेज' करता था। इस सिंडिकेट का मुख्य काम टेंडर निकलने से पहले ही पात्रता शर्तों और तकनीकी मापदंडों को अपने पसंदीदा फर्मों के हिसाब से सेट करना था। बदले में रिशु श्री टेंडर की कुल लागत का 7 से 10 फीसदी कमीशन लेता था, जिसका एक बड़ा हिस्सा सरकारी अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचता था। ईडी और एसवीयू की छापेमारी में मुमुक्षु चौधरी के आवास से करोड़ों की नकदी भी बरामद हुई थी।
अधिकारियों पर कसा शिकंजा
सम्राट चौधरी सरकार ने इस मामले को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। अब तक इस घोटाले में आईएएस अधिकारियों से लेकर इंजीनियरों और प्रशासनिक सेवा के अफसरों पर गाज गिरी है। रिशु श्री की गिरफ्तारी के बाद से ही एसवीयू ने कई जिलों में छापेमारी की, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि रिशु ने मुमुक्षु चौधरी की तैनाती के दौरान सीतामढ़ी और सहरसा जैसे जिलों में करोड़ों के टेंडर अवैध तरीके से हासिल किए थे। सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाने वाले इस नेटवर्क के खिलाफ अब कानून का शिकंजा कसता जा रहा है।
सरकार का स्पष्ट संदेश: शॉर्टकट का रास्ता सीधे जेल
हाल ही में विजिलेंस अवेयरनेस वीक के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि बिहार में अब सरकारी व्यवस्था में 'शॉर्टकट' का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार की यह सख्ती यह दर्शाती है कि आने वाले समय में टेंडर प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बड़े तकनीकी और प्रशासनिक सुधार किए जा सकते हैं। इस घोटाले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे कई और बड़े चेहरों के बेनकाब होने की संभावना है।