भरत तिवारी एनकाउंटर: सरेंडर के बाद पहली गोली मारने वाला STF जवान अक्षय कुमार गिरफ्तार, जानें मौत से ठीक पहले क्या हुआ

भरत तिवारी एनकाउंटर: सरेंडर के बाद पहली गोली मारने वाला STF जवान अक्षय कुमार गिरफ्तार, जानें मौत से ठीक पहले क्या हुआ

बिहार के भोजपुर (आरा) जिले का चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपी एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को देर रात गिरफ्तार कर लिया है। अक्षय कुमार पर आरोप है कि उसने आत्मसमर्पण कर चुके सोशल एक्टिविस्ट भरत तिवारी को पहली गोली मारी थी। इस गिरफ्तारी के बाद से इस कथित एनकाउंटर को लेकर कई नए राज खुलने की उम्मीद है।

कौन है आरोपी एसटीएफ जवान अक्षय कुमार?

अक्षय कुमार बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) में सिपाही के पद पर तैनात है। 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिलौटी गांव में हुए इस एनकाउंटर के दौरान वह एसटीएफ टीम का हिस्सा था। प्राथमिक जांच और एफआईआर (FIR) के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान अक्षय कुमार ने अपनी सरकारी पिस्टल से 4 राउंड फायरिंग की थी। तकनीकी जांच और सर्विलांस के आधार पर फरार चल रहे इस जवान को आखिरकार आरा पुलिस और एसटीएफ ने दबोच लिया।

सरेंडर के बाद गोली मारने का क्या है पूरा विवाद?

मृतक भरत तिवारी के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का शुरू से ही आरोप था कि यह एकतरफा और पूरी तरह से फर्जी एनकाउंटर है। 28 वर्षीय भरत तिवारी कोई पेशेवर अपराधी या शूटर नहीं थे, बल्कि वह बाढ़, विस्थापन और गरीबों के मुद्दों पर आवाज उठाने वाले एक सोशल एक्टिविस्ट थे।

मौत से ठीक पहले भरत तिवारी सोशल मीडिया पर फेसबुक लाइव कर रहे थे। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि भरत ने अपनी पिस्टल दूर फेंक दी थी और पुलिस के सामने पूरी तरह सरेंडर कर चुके थे। परिजनों का आरोप है कि निहत्थे होने और आत्मसमर्पण करने के बावजूद एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने सीधे उन पर गोली चला दी। वह गोली भरत की जांघ में लगी और वह वहीं गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें और गोलियां मारी गईं।

मुख्यमंत्री की मुलाकात और प्रशासनिक फेरबदल

इस संवेदनशील मामले को लेकर पूरे बिहार में सामाजिक और सियासी आक्रोश देखने को मिल रहा है। हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़ित परिवार को पटना बुलाकर मुलाकात की थी और न्याय का भरोसा दिया था।

इस मामले में लापरवाही और संदिग्ध भूमिका पाए जाने के बाद शाहपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश मालाकार सहित 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। इसके अलावा तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ (SDPO) राजेश कुमार शर्मा और एसडीओ (SDO) संजीत कुमार को भी उनके पदों से हटाकर मुख्यालय व सामान्य प्रशासन विभाग में भेज दिया गया है。

अब आगे क्या? फॉरेंसिक जांच पर टिकी निगाहें

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट के आदेश पर शाहपुर पुलिस, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार और मृतक भरत तिवारी के पास से बरामद सभी हथियारों को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) जांच के लिए भेजा गया है। बैलिस्टिक रिपोर्ट आने के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि किस सरकारी हथियार से चली गोली भरत तिवारी को लगी थी। फिलहाल पुलिस आरोपी जवान से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

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