Income Tax Rules: बैंक ब्याज पर TDS को लेकर दूर हुआ कन्फ्यूजन! नए इनकम टैक्स कानून 2025 में भी बरकरार रहेगी पुरानी राहत, जानें क्या है नई सफाई
नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 (New Income Tax Act 2025) के लागू होने के साथ ही करोड़ों बैंक खाताधारकों और छोटे निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल था—क्या अब बैंक से मिलने वाले मामूली ब्याज पर भी टैक्स (TDS) कटेगा? इस भ्रम को दूर करने के लिए आयकर विभाग ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने साफ किया है कि नियमों की शब्दावली में बदलाव के बावजूद, आम आदमी को मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा और प्रक्रिया में कोई वास्तविक बदलाव नहीं किया गया है। छोटे निवेशकों को पहले की तरह ही बैंक इंटरेस्ट पर राहत मिलती रहेगी।
क्या है TDS का मौजूदा नियम और सीमा?
आयकर विभाग की नई सफाई के अनुसार, बैंक से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) तभी काटा जाता है जब वह एक निश्चित वित्तीय सीमा को पार कर जाए। वर्तमान में ये सीमाएं इस प्रकार हैं:
आम नागरिक: यदि एक वित्तीय वर्ष में बैंक एफडी (FD) या सेविंग्स अकाउंट से मिलने वाला कुल ब्याज ₹40,000 से अधिक है, तो 10% TDS काटा जाता है।
वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizens): बुजुर्गों के लिए यह सीमा ₹50,000 तय की गई है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि नए कानून के तहत भी ये लिमिट्स प्रभावी रहेंगी और इससे कम ब्याज पर कोई कटौती नहीं होगी।
नए कानून 2025 के सेक्शन 393(1) पर क्यों था विवाद?
भ्रम की मुख्य वजह नए कानून का सेक्शन 393(1) था। पुराने इनकम टैक्स एक्ट में बैंकिंग संस्थानों का जिक्र बहुत विस्तार से किया गया था, जबकि नए ड्राफ्ट में इसे संक्षिप्त कर दिया गया। इससे निवेशकों को लगा कि शायद को-ऑपरेटिव बैंक या कुछ चुनिंदा वित्तीय संस्थान अब TDS छूट के दायरे से बाहर हो गए हैं। टैक्स विभाग ने अब साफ कर दिया है कि बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के तहत आने वाले सभी संस्थान 'बैंकिंग कंपनी' ही माने जाएंगे और उन पर पुराने नियम ही लागू होंगे।
आम आदमी को क्या होगा फायदा?
सरकार के इस स्पष्टीकरण का सीधा फायदा उन लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों और रिटायरमेंट के बाद ब्याज पर निर्भर रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा, जो अपनी जमा पूंजी पर टीडीएस कटने से चिंतित थे।
कोई अतिरिक्त बोझ नहीं: छोटे निवेशकों को अपनी जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज पर बेवजह टैक्स कटौती का सामना नहीं करना पड़ेगा।
फॉर्म 15G/15H का विकल्प: यदि आपकी कुल सालाना आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है, तो आप अभी भी बैंक में फॉर्म 15G (आम नागरिक) या 15H (सीनियर सिटीजन) जमा कर टीडीएस कटौती को रुकवा सकते हैं।
IT विभाग की सलाह: घबराएं नहीं, नियम वही हैं
आयकर विभाग ने करदाताओं को आश्वस्त किया है कि नए कानून का उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल बनाना है, न कि आम आदमी पर टैक्स का बोझ बढ़ाना। यदि आपका बैंक ब्याज तय सीमा के भीतर है, तो बैंक आपकी अनुमति या पूर्व सूचना के बिना टीडीएस नहीं काट सकता। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने बैंक स्टेटमेंट की नियमित जांच करें और किसी भी विसंगति की स्थिति में तुरंत बैंक प्रबंधक या टैक्स सलाहकार से संपर्क करें।