Income Tax Notice : ITR फाइल नहीं किया? सिर्फ जुर्माना नहीं, इन 5 मुश्किलों के लिए भी हो जाएं तैयार

Post

News India Live, Digital Desk:  Income Tax Notice : इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन आते ही कई लोगों के लिए यह एक सिरदर्द जैसा काम बन जाता है। 'कल कर लेंगे', 'अभी तो बहुत टाइम है' – यही सोचते-सोचते अक्सर आखिरी तारीख (Last Date) सिर पर आ जाती है। कई लोग तो आखिरी तारीख भी चूक जाते हैं और सोचते हैं कि ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, थोड़ा जुर्माना ही तो लगेगा!

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो आप एक बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। ITR समय पर फाइल न करना सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं है। यह अपने साथ कई ऐसी मुसीबतें लेकर आता है जो आपकी जेब और मानसिक शांति, दोनों पर भारी पड़ सकती हैं। आइए जानते हैं कि ITR की डेडलाइन मिस करने का मतलब असल में क्या होता है।

1. जुर्माना तो लगना तय है (Penalty)

यह सबसे सीधा और पहला असर है। अगर आप आखिरी तारीख के बाद ITR फाइल करते हैं, तो इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 234F के तहत आप पर जुर्माना लगाया जाता है।

  • अगर आपकी कुल आमदनी 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आपको ₹5,000 का जुर्माना देना होगा।
  • अगर आमदनी 5 लाख रुपये से कम है, तो यह जुर्माना ₹1,000 होता है।

यह तो बस शुरुआत है, असली मुसीबतें तो अब शुरू होती हैं।

2. ब्याज का मीटर चालू (Interest on Tax Due)

अगर आपकी कोई टैक्स देनदारी बनती है (यानी आपको सरकार को टैक्स चुकाना है), तो सिर्फ जुर्माना देकर आप बच नहीं सकते। जिस दिन से आखिरी तारीख निकली, उसी दिन से आपकी बकाया टैक्स राशि पर ब्याज का मीटर चालू हो जाता है। सेक्शन 234A के तहत आपको हर महीने 1% की दर से ब्याज देना पड़ता है, जब तक कि आप पूरा टैक्स चुका न दें।

3. नुकसान को भूल जाइए (Loss Carry Forward)

यह सबसे बड़े नुकसानों में से एक है, जिसके बारे में ज्यादातर लोगों को पता नहीं होता। अगर आपको किसी साल बिजनेस में या शेयर बाजार (कैपिटल गेन्स) में नुकसान हुआ है, तो आप उस नुकसान को अगले 8 सालों तक आगे ले जा सकते हैं (carry forward) और भविष्य के मुनाफे से एडजस्ट करके अपना टैक्स बचा सकते हैं।

लेकिन इसकी एक शर्त है – आपको अपना ITR समय पर फाइल करना होगा। अगर आपने एक दिन की भी देरी की, तो आप अपने इस नुकसान को आगे ले जाने का अधिकार खो देंगे (सिर्फ हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान को छोड़कर)। यह हजारों-लाखों का नुकसान हो सकता है।

4. रिफंड में देरी (Delayed Refund)

कई लोग ITR इसलिए भरते हैं क्योंकि उनका TDS ज्यादा कट गया होता है और उन्हें सरकार से रिफंड लेना होता है। अगर आप समय पर रिटर्न फाइल नहीं करेंगे, तो आपका रिफंड भी अटक जाएगा। विभाग पहले लेट फाइलिंग वालों के बजाय समय पर फाइल करने वालों के केस प्रोसेस करता है। मतलब, आपके मेहनत के पैसे आपको ही देर से मिलेंगे।

5. इनकम टैक्स विभाग की नज़र में आना (Increased Scrutiny)

समय पर ITR फाइल न करना आपको इनकम टैक्स विभाग की नजरों में एक गैर-जिम्मेदार टैक्सपेयर बना देता है। इससे इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि भविष्य में आपके केस को जांच (Scrutiny) के लिए चुन लिया जाए या आपको विभाग की तरफ से कोई नोटिस आ जाए। यह एक बेवजह की मानसिक परेशानी को न्योता देने जैसा है।

इसलिए, ITR को सिर्फ एक फॉर्म समझने की गलती न करें। यह आपकी वित्तीय सेहत से जुड़ा एक बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज है। समय पर इसे फाइल करना न सिर्फ एक कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि यह आपके अपने ही हित में है।