कर्ज के बोझ से दबे हैं तो 2 दिसंबर की तारीख नोट कर लें! बन रहा है 'भौम प्रदोष' का दुर्लभ संयोग, शिव जी करेंगे बेड़ा पार

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Pradosh Vrat Date: हर इंसान चाहता है कि उसका जीवन खुशहाल रहे, लेकिन कई बार न चाहते हुए भी सिर पर कर्ज का बोझ चढ़ जाता है। लाख कोशिशों के बाद भी जब उधारी नहीं उतरती, तो इंसान अंदर से टूटने लगता है। अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो दिसंबर का पहला हफ्ता आपके लिए नई उम्मीद की किरण लेकर आ रहा है।

हिंदू धर्म में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए 'प्रदोष व्रत' (Pradosh Vrat) को सबसे उत्तम माना गया है। लेकिन जब यह व्रत मंगलवार (Tuesday) को पड़ जाए, तो इसे 'भौम प्रदोष' कहते हैं। शास्त्रों में इसे कर्ज मुक्ति के लिए रामबाण माना गया है।

आइये जानते हैं कि साल के आखिरी महीने में यह शुभ दिन कब है और पूजा का सही समय क्या है।

तारीख को लेकर कन्फ्यूजन न रखें (Date & Timing)

पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष (अगहन) माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 2 दिसंबर की दोपहर से शुरू होगी और अगले दिन तक रहेगी। चूंकि प्रदोष व्रत में पूजा शाम के समय (प्रदोष काल) की जाती है, इसलिए यह व्रत 02 दिसंबर 2025, मंगलवार को ही रखा जाएगा।

  • त्रयोदशी शुरू: 02 दिसंबर, दोपहर 3:57 बजे से
  • त्रयोदशी समाप्त: 03 दिसंबर, दोपहर 12:25 बजे तक
  • इसलिए व्रत: 2 दिसंबर को ही करें।

पूजा का 'गोल्डन टाइम' (Shubh Muhurat)

भोलेनाथ की पूजा का सबसे ज्यादा फल तब मिलता है जब आप सही मुहूर्त में पूजा करें। इस बार शाम का समय बहुत शुभ है।

  • शुभ मुहूर्त: शाम 05:24 से रात 08:07 बजे तक।
  • इस बीच आप स्नान करके मंदिर जाएं या घर पर ही शिव परिवार की विधिवत पूजा करें।

क्यों खास है 'भौम प्रदोष'? (कर्ज मुक्ति का राज)

वैसे तो हर प्रदोष व्रत सफलता देता है, लेकिन 'मंगलवार' का प्रदोष बहुत खास होता है। ज्योतिष में मंगल ग्रह को कर्ज और भूमि का कारक माना जाता है।
मान्यता है कि जब आप भौम प्रदोष के दिन व्रत रखकर शाम को भगवान शिव की आराधना करते हैं, तो आपकी जन्म कुंडली में मंगल की स्थिति सुधरती है।

  • सरल उपाय: पुराण कहते हैं कि इस दिन शिव पूजा के साथ-साथ अगर आप 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ कर लें, तो पुराने से पुराना कर्ज उतरने के रास्ते अपने आप खुलने लगते हैं।

कैसे करें व्रत?

यह व्रत सुबह से शुरू होकर शाम की पूजा तक निर्जला या फलाहार पर किया जाता है। शाम को सूर्यास्त के समय दोबारा स्नान करें, सफ़ेद वस्त्र पहनें और शिव जी को बेलपत्र, जल और धतूरा चढ़ाएं। इसके बाद ही भोजन ग्रहण करें।

तो अगर आप भी जीवन की भागदौड़ और कर्ज से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो इस भौम प्रदोष पर महादेव की शरण में जरूर जाएं।